
प्रतीकात्मक छवि (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
New Delhi: भारत में महिलाओं के बीच सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) का खतरा लगातार पैर पसार रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, इस जानलेवा बीमारी के बढ़ने की सबसे बड़ी वजह समय पर इसकी पहचान न हो पाना है। नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट (NCI) झज्जर की प्रमुख और एम्स (AIIMS) नई दिल्ली के प्रसूति विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉक्टर नीरजा भाटला के अनुसार, सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) का लगातार संक्रमण है।
हालांकि इस बीमारी को रोकने के लिए सबसे सटीक जरिया HPV टेस्ट है, लेकिन महंगा होने के कारण यह देश की आम महिलाओं की पहुंच से दूर है। ऐसे में भारत में विकसित किए जा रहे सस्ते और स्वदेशी 'पॉइंट-ऑफ-केयर' (PoC) टेस्ट इस जंग में एक बड़ा हथियार साबित हो सकते हैं।
डॉक्टर नीरजा भाटला का कहना है कि हमें देश में 'पॉइंट-ऑफ-केयर' (PoC) टेस्टिंग पर ध्यान केंद्रित करने की सख्त आवश्यकता है। PoC टेस्टिंग का सीधा मतलब है कि ऐसी जांच जो मरीज के पास ही (जैसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर) तुरंत की जा सके और जिसका रिजल्ट भी मौके पर ही मिल जाए। इसके लिए सैंपल को किसी बड़ी लैब में भेजने या हफ्तों तक रिपोर्ट का इंतजार करने की जरूरत नहीं पड़ती।
अगर भारत में सस्ता, सरल और विश्वसनीय स्वदेशी PoC HPV टेस्ट व्यापक रूप से उपलब्ध हो जाए, तो ग्रामीण स्तर पर आशा (ASHA) कार्यकर्ताओं या पीएचसी (PHC) स्तर पर ही महिलाओं की आसानी से स्क्रीनिंग की जा सकेगी। इससे देश के आखिरी छोर तक स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा बढ़ेगा।
वर्तमान में बाजार में उपलब्ध अधिकांश मॉलिक्यूलर टेस्ट उच्च आय वाले देशों में विकसित किए गए हैं। वे वायरस के कई प्रकारों (वेरिएंट्स) को टारगेट करते हैं, जिससे उनकी लागत और जटिलता दोनों बहुत बढ़ जाती है। डॉक्टर नीरजा ने बताया कि हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के 'टारगेट प्रोडक्ट प्रोफाइल' (TPP) के मानदंडों के तहत भारत में विकसित कम-वैलेंसी वाले HPV टेस्ट्स का मूल्यांकन करने के लिए एक शुरुआती स्टडी की गई है।
इसका मुख्य उद्देश्य ऐसे टेस्ट तैयार करना है जो सर्वाइकल कैंसर के लिए जिम्मेदार 8 सबसे आम HPV प्रकारों की सटीक पहचान कर सकें। यह स्टडी साबित करती है कि भारत के स्वदेशी प्लेटफॉर्म भी अंतरराष्ट्रीय 'गोल्ड-स्टैंडर्ड' टेस्ट्स के बराबर सटीकता और क्लिनिकल वैलिडेशन हासिल कर सकते हैं।
देश में सर्वाइकल कैंसर की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह आज भी भारत की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। आंकड़ों के मुताबिक, भारत में हर साल सर्वाइकल कैंसर के करीब 1,27,000 नए मामले दर्ज किए जाते हैं, जिनमें से लगभग 80,000 महिलाओं की इस बीमारी के कारण मौत हो जाती है। स्वास्थ्य नियमों के अनुसार, 30 साल से अधिक उम्र की महिलाओं की हर 3 से 5 साल में नियमित स्क्रीनिंग होनी चाहिए ताकि कैंसर की शुरुआती स्टेज का पता लगाकर समय पर इलाज शुरू किया जा सके।
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सरकार के राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम में वर्तमान में ओरल, ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग शामिल है। सर्वाइकल कैंसर के लिए वीआईए (VIA - विजुअल इंस्पेक्शन विद एसिटिक एसिड) टेस्ट का उपयोग किया जाता है जो सस्ता है, लेकिन फिर भी देश में स्क्रीनिंग का कुल कवरेज बहुत कम है।
दूसरी तरफ, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का स्पष्ट कहना है कि सर्वाइकल कैंसर को पूरी तरह खत्म करने के लिए सिर्फ दो बार (35 वर्ष और 45 वर्ष की उम्र में) की जाने वाली हाई-क्वालिटी HPV टेस्टिंग ही काफी है। यदि भारत सरकार सस्ते स्वदेशी PoC टेस्ट को तेजी से बढ़ाती है, तो देश 2030 तक सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन के वैश्विक लक्ष्य को आसानी से हासिल कर सकता है।
Location : New Delhi
Published : 10 June 2026, 2:44 PM IST