धनबाद में आयोजित नेशनल लोक अदालत ने शुरुआती दो घंटे में 2,91,356 विवाद निपटाए और 1,36,43,70,931 रुपये की रिकवरी की। कार्यक्रम का उद्घाटन न्यायमूर्ति सुजित नारायण प्रसाद ने ऑनलाइन किया और प्रधान जिला न्यायाधीश निकेश कुमार सिन्हा ने कहा कि इसका उद्देश्य आम लोगों तक तेज़ और सुलभ न्याय पहुंचाना है।

अवर न्यायाधीश सह सचिव मयंक तुषार
Dhanbad: नेशनल लोक अदालत ने न्याय व्यवस्था को आम लोगों तक तेज़ और सुलभ तरीके से पहुंचाने का महत्वपूर्ण उदाहरण पेश किया। नालसा के निर्देश पर साल 2026 की पहली नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में शुरुआती दो घंटे के भीतर ही बड़ी सफलता मिली। जिसके तहत कुल 2,91,356 विवादों का निपटारा किया गया और 1,36,43,70,931 रुपये की रिकवरी की गई।
कार्यक्रम का उद्घाटन जमशेदपुर से ऑनलाइन न्यायमूर्ति सुजित नारायण प्रसाद ने किया। धनबाद में आयोजित कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह डालसा चेयरमैन निकेश कुमार सिन्हा ने लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि नेशनल लोक अदालत संविधान की उस भावना को साकार करती है। जिसमें हर व्यक्ति को सामाजिक, आर्थिक और सुलभ न्याय की गारंटी दी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि हर तीन महीने में इसका आयोजन किया जाता है। जिसमें आम लोगों को जल्द और प्रभावी न्याय मिल सके।
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लोक अदालत में कई मानवीय पहल भी देखने को मिली। सड़क दुर्घटना में अपने माता-पिता को खोने वाले प्रभु साव को 1.38 करोड़ रुपये का मुआवजा चेक दिया गया। चेक मिलने के बाद प्रभु साव भावुक हो गए और उन्होंने कहा कि डालसा ने उन्हें नया जीवन दिया है। इसी तरह दुर्घटना में पति को खोने वाली एक विधवा महिला को 82 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान किया गया। इस पहल ने साबित किया कि लोक अदालत केवल कानूनी मामलों तक सीमित नहीं है, बल्कि आम लोगों की जीवन स्थितियों में भी मदद कर रही है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अवर न्यायाधीश सह सचिव मयंक तुषार टोपनो ने बताया कि इस लोक अदालत में 13 बेंचों का गठन किया गया था। इन बेंचों में अधिकांश 2,54,975 प्री-लिटिगेशन मामले शामिल थे। जिन्हें तेजी से निपटाया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि लोक अदालत ने केवल संख्या में ही नहीं, बल्कि समयबद्ध और प्रभावी न्याय के मामले में भी बड़ी सफलता हासिल की है।
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सामाजिक सरोकार के तहत इस कार्यक्रम में दो दिव्यांग व्यक्तियों को ट्राइसाइकिल और दिव्यांग प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इसके अलावा चार अनाथ बच्चों को स्पॉन्सरशिप योजना से जोड़ा गया और उनकी पढ़ाई के लिए चार-चार हजार रुपये की सहायता दी गई।