Holi 2026: चंद्र ग्रहण के साए में होलिका दहन, जानिए कब खेलें रंग

3 मार्च को चंद्र ग्रहण के कारण होली की तारीख को लेकर असमंजस। बैद्यनाथ धाम के पुजारियों ने बताया होलिका दहन और रंग खेलने का सही शुभ मुहूर्त। जानें कब मनाएं होली 2026।

Post Published By: Sapna Srivastava
Updated : 3 March 2026, 10:24 AM IST

Deoghar: इस बार होली को लेकर लोगों के मन में संशय गहरा गया था, क्योंकि 3 मार्च को चंद्र ग्रहण पड़ रहा है। सवाल यही था कि रंगों की होली 3 मार्च को मनाई जाए या 4 मार्च को। इस उलझन को दूर करने के लिए देवघर स्थित बैद्यनाथ धाम मंदिर के वरिष्ठ पुजारियों ने शास्त्र सम्मत जानकारी साझा की है।

3 मार्च को रहेगा चंद्र ग्रहण

बैद्यनाथ धाम के वरिष्ठ पुजारी Baba Jhalak के अनुसार 3 मार्च को शाम 5:30 बजे से लगभग 7:00 बजे तक चंद्र ग्रहण रहेगा। शास्त्रों के मुताबिक ग्रहण काल में किसी भी प्रकार का शुभ कार्य वर्जित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले सूतक काल प्रारंभ हो जाता है। इसी कारण इस बार होली के शुभ मुहूर्त को लेकर विशेष सावधानी बरती जा रही है।

होलिका दहन का समय क्या रहेगा?

मंदिर के वरिष्ठ पुजारी Baba Nitesh ने बताया कि ग्रहण और सूतक काल को ध्यान में रखते हुए होलिका दहन 3 मार्च की अहले सुबह 3:50 बजे किया जाएगा। इसके बाद सुबह 5:30 बजे ‘हरिहर मिलन’ का आयोजन होगा, जिसमें बाबा पर रंग और गुलाल अर्पित किया जाएगा। मंदिर पर रंग चढ़ते ही होली उत्सव की औपचारिक शुरुआत मानी जाएगी।

मंदिर का पट पूरी रात रहेगा खुला

ग्रहण के प्रभाव को देखते हुए 2 मार्च की रात मंदिर का पट खुला रहेगा, ताकि श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर सकें। यह व्यवस्था विशेष रूप से सूतक काल के कारण की गई है, जिससे भक्तों को असुविधा न हो। पुजारियों के अनुसार 3 मार्च की सुबह से दोपहर लगभग 1:00 बजे तक होली खेलने का शुभ समय रहेगा।

आम लोगों के लिए क्या है संदेश?

हालांकि शास्त्रों के अनुसार 3 मार्च की सुबह शुभ मानी गई है, लेकिन अधिकांश लोग 4 मार्च को रंगों की होली खेलेंगे। धार्मिक दृष्टि से जो लोग मुहूर्त का पालन करना चाहते हैं, वे 3 मार्च की सुबह होली मना सकते हैं। देवघर से साफ संदेश दिया गया है कि ग्रहण का प्रभाव जरूर है, लेकिन आस्था और परंपरा के उत्साह में कोई कमी नहीं आएगी।

चंद्र ग्रहण और धार्मिक मान्यता

चंद्र ग्रहण को हिंदू धर्म में विशेष खगोलीय घटना माना जाता है। ग्रहण काल में पूजा-पाठ, भोजन और शुभ कार्यों को लेकर सावधानी बरती जाती है। सूतक काल के दौरान मंदिरों के पट बंद रखने की परंपरा भी कई स्थानों पर प्रचलित है। हालांकि खगोल विज्ञान के अनुसार ग्रहण एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन धार्मिक आस्था के कारण इसका सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व भी बना रहता है।

Location : 
  • Deoghar

Published : 
  • 3 March 2026, 10:24 AM IST