
मिडिल ईस्ट में महायुद्ध की आहट (Img- Pinterest)
Washington: अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण तनाव अब चरम पर पहुंच गया है। दोनों देशों के बीच युद्ध थमने के बजाय और अधिक आक्रामक होता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस वीकेंड तक अपनी सेना को ईरान पर एक और बड़ा हमला करने का कड़ा निर्देश जारी किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका के इस प्रस्तावित सैन्य एक्शन का सीधा मकसद तेहरान को बातचीत की मेज पर झुकने के लिए मजबूर करना है।
इस बार अमेरिका, ईरान के सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहने वाला है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वॉशिंगटन अब तेहरान के पावर प्लांट और पेट्रोलियम रिफाइनरियों जैसे प्रमुख ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाने की योजना बना रहा है। ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा है कि "हम उन पर ऐसा जोरदार हमला करेंगे कि एक समय वे कहेंगे कि अब और बर्दाश्त नहीं होता।"
इस खबर के सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में हड़कंप मच गया और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमतें उछलकर 86 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गईं।
व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक ईरान अमेरिका की शर्तों पर बातचीत के लिए तैयार नहीं होता, उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। दूसरी तरफ, मानवाधिकार संगठनों ने अमेरिका की इस रणनीति पर गहरी चिंता जताई है।
उनका कहना है कि आम नागरिकों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली सुविधाओं और बिजली-पानी के ठिकानों पर जानबूझकर हमला करना अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत 'युद्ध अपराध' की श्रेणी में आ सकता है।
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अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद पूरे मध्य पूर्व में भारी अस्थिरता फैल चुकी है। इसके जवाब में तेहरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को बंद कर दिया है। इस रास्ते के ब्लॉक होने से कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और उर्वरकों की वैश्विक सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई है, जिससे पूरी दुनिया पर एक बड़े आर्थिक और ऊर्जा संकट का खतरा मंडराने लगा है।
Location : Washington
Published : 1 August 2026, 11:35 AM IST