अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानी जनता को अल्टीमेटम दिया है कि वे अपने घरों के भीतर रहें, ईरान में बमबारी हो रही हैै। उन्होंने ईरानी सैनिकों को भी चेतावनी दी है कि वे हथियार डाल दें। जो आत्मसमर्पण करेगा, उसे माफ कर दिया जाएगा।

वाशिंगटन: अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ जो जंग शुरू की है, वह चारों ओर आग उगल रही है। हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक वीडियो संदेश जारी कर ईरानी जनता और सेना को बड़ा अल्टीमेटम दिया है। एक ओर ट्रंप ने ईरानी सैनिकों को हथियार डालने के लिए कहा, तो दूसरी तरफ ईरान के लोगों को आगाह किया है कि वे अपने घरों के भीतर सुरक्षित रहें। संदेश साफ है कि ईरान पर भीषण बमबारी होने वाली है।
डोनाल्ड ट्रंप ने वीडियो संदेश में ईरान के आम लोगों सको बड़े भावुक और सख्त लहजे में कहा कि फिलहाल अपने घरों के अंदर ही रहें। ट्रंप ने दो टूक कहा कि बाहर निकलना बहुत खतरनाक हो सकता है, क्योंकि हर तरफ बम गिर रहे हैं। उन्होंने ईरानी जनता से अपील की कि जैसे ही यह युद्ध खत्म होगा, वे आगे आएं और अपनी सरकार की कमान खुद संभाल लें। ट्रंप का मानना है कि अब ईरान की आजादी का वक्त आ गया है और इस बार अमेरिका पूरी ताकत से उनके पीछे खड़ा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान की सेना और 'रिवोल्यूशनरी गार्ड्स' को भी कड़ा अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा कि वहां की पुलिस और फौज को तुरंत अपने हथियार डाल देने चाहिए। ट्रंप ने वादा किया कि जो सैनिक हथियार डाल देंगे, उन्हें पूरी तरह माफी और सुरक्षा दी जाएगी, लेकिन जो मुकाबला करेंगे, उन्हें मौत का सामना करना पड़ेगा। ट्रंप के इस संदेश का साफ मतलब है कि अमेरिका इस बार किसी भी तरह के समझौते के मूड में नहीं है और वह ईरान के सैन्य ढांचे को पूरी तरह खत्म करना चाहता है।
ईरान पर हमले की वजह ट्रंप ने यह बताई कि पिछले 47 सालों से ईरान 'अमेरिका की मौत' के नारे लगा रहा है। मासूमों का खून बहा रहा है। उन्होंने इसे एक 'बड़े युद्ध ऑपरेशन' का नाम दिया है जिसका मकसद अमेरिकी लोगों की सुरक्षा करना है। ट्रंप ने एक बार फिर दोहराया कि उनकी सरकार की नीति बहुत साफ है—ईरान को कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाने दिया जाएगा।
ट्रंप ने कहा कि ईरान ने बार-बार बातचीत के मौकों को ठुकराया और अपनी मिसाइल ताकत बढ़ाकर पूरी दुनिया के लिए खतरा पैदा कर दिया, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
ट्रंप ने कहा कि वे ईरान की मिसाइल इंडस्ट्री और उनकी नौसेना को पूरी तरह से मिट्टी में मिला देंगे। उन्होंने कहा कि अमेरिका की ताकत के सामने कोई टिक नहीं पाएगा। हालांकि, ट्रंप ने यह भी स्वीकार किया कि इस बड़े मिशन में अमेरिकी सैनिकों की जान जाने का भी खतरा है, लेकिन उन्होंने इसे आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए एक जरूरी और 'नेक मिशन' बताया है।