अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद भी युद्ध थमता नहीं दिख रहा। ईरान ने न सिर्फ जवाबी हमले तेज कर दिए बल्कि होर्मुज जलडमरूमध्य को भी बंद कर दिया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति उलटी पड़ गई और उनकी बड़ी योजना अधूरी रह गई।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Image Source: Google)
New Delhi: 28 फरवरी 2026 की सुबह पश्चिम एशिया में तब भूचाल आ गया जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू कर दिए। इन हमलों में ईरान के परमाणु और मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मारे गए। इस ऑपरेशन को अमेरिका की ओर से एक बड़ी सैन्य सफलता माना गया।
दुनिया भर में इस खबर के बाद हलचल मच गई। कई देशों ने इसे पश्चिम एशिया में बड़े युद्ध की शुरुआत बताया। अमेरिका की सैन्य ताकत को देखकर कई देशों में चिंता बढ़ गई कि कहीं यह संघर्ष और ज्यादा न फैल जाए। इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का रुख बेहद आक्रामक माना गया। उनका मानना था कि इतने बड़े हमले के बाद ईरान ज्यादा समय तक युद्ध नहीं झेल पाएगा और जल्द ही झुक जाएगा।
लेकिन घटनाक्रम उम्मीद से अलग दिशा में आगे बढ़ा। हमलों के कुछ ही घंटों के भीतर ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। ईरान ने सीधे अमेरिका पर हमला करने के बजाय उसके सहयोगी देशों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू किया। सबसे पहले इजरायल पर मिसाइल हमले किए गए। इसके अलावा उन अरब देशों को भी निशाना बनाया गया, जहां अमेरिका के सैन्य अड्डे मौजूद हैं।
ईरान की सबसे बड़ी रणनीतिक चाल थी होरमुज़ जलसंधि को अवरुद्ध करना। यह वही समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से तक तेल और गैस की आपूर्ति होती है। होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावित होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में हड़कंप मच गया। कई देशों में तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ने लगीं और व्यापार पर भी असर पड़ा। अमेरिका के सहयोगी देशों ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई और जल्द युद्ध समाप्त करने की अपील की।
अमेरिका को उम्मीद थी कि भारी सैन्य दबाव के बाद ईरान जल्दी ही सरेंडर कर देगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके उलट ईरान के अंदर राजनीतिक एकजुटता और मजबूत होती दिखी। ईरान ने जल्द ही नया नेतृत्व भी तय कर लिया और मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता चुना गया।
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका की रणनीति का एक हिस्सा यह भी था कि ईरान में अपनी पसंद का नेतृत्व स्थापित किया जाए। लेकिन ईरान के भीतर बढ़ी एकजुटता ने इस योजना को मुश्किल बना दिया। युद्ध अब कई दिनों से जारी है और ईरान झुकने के संकेत नहीं दे रहा। ऐसे में अमेरिका के लिए स्थिति उतनी आसान नहीं रही जितनी शुरुआत में लग रही थी।
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हाल ही में ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका ने ईरान में अपने अधिकांश सैन्य लक्ष्य पूरे कर लिए हैं और युद्ध जल्द खत्म हो सकता है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय पश्चिम एशिया में यह संघर्ष अभी लंबे समय तक जारी रह सकता है। दुनिया भर की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति इस संकट को खत्म कर पाएगी या फिर यह युद्ध और ज्यादा फैल जाएगा।