
भारत की स्थायी सदस्यता पर रूस का समर्थन (सोर्स- एक्स)
New Delhi: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों और भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी को लेकर वैश्विक कूटनीति में एक बार फिर बड़ा मोड़ आया है। एक तरफ जहां रूस ने भारत की स्थायी सदस्यता का पुरजोर समर्थन कर अपनी पुरानी और गहरी दोस्ती का सबूत दिया है, वहीं दूसरी तरफ तथाकथित रूप से भारत के मित्र कहे जाने वाले जापान और जर्मनी ने इस पूरी प्रक्रिया में किनारा करते हुए कन्नी काट ली है। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नए समीकरणों को उजागर कर दिया है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा से इतर रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता के पक्ष में स्पष्ट और कड़ा बयान दिया है। रूस का साफ मानना है कि सुरक्षा परिषद में वैश्विक वास्तविकताओं कोझलकाते हुए एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाना अनिवार्य है। इसी कड़ी में मास्को ने भारत और ब्राजील की उम्मीदवारी का समर्थन करने की आधिकारिक घोषणा की है। रूस के इस कदम को कूटनीतिक मोर्चे पर भारत के लिए एक बड़ी जीत और दोनों देशों के बीच अटूट विश्वास का प्रतीक माना जा रहा है।
जहां रूस ने भारत का साथ दिया, वहीं उसने पश्चिमी देशों और विशेष तौर पर जी-4 के अन्य सहयोगियों- जर्मनी और जापान के रवैये पर तीखा प्रहार किया। रूसी विदेश मंत्री ने सुरक्षा परिषद में पश्चिमी देशों की अतिरिक्त सीटों का कड़ा विरोध किया। लावरोव ने जर्मनी और जापान का विशेष रूप से नाम लेते हुए आरोप लगाया कि ये देश एक बार फिर 'सैन्यवाद और बदले की भावना' की ओर बढ़ रहे हैं। इसके साथ ही रूस ने यह भी स्पष्ट किया कि UNSC में किसी भी सुधार के दौरान मौजूदा पाँच स्थायी सदस्यों के अधिकारों और शक्तियों में कोई कमी नहीं आनी चाहिए।
गौरतलब है कि भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान साल 2010 से 'जी-4' (G4) समूह के तहत संयुक्त रूप से स्थायी सीटों की मांग आगे बढ़ा रहे हैं। लेकिन हालिया घटनाक्रम से साफ हो गया है कि इस मोर्चे पर आंतरिक मतभेद गहरे हैं। एक तरफ जहां भारत के पारंपरिक मित्र रूस ने भारत के हक में आवाज बुलंद की है, वहीं जी-4 के ही साथी देश जर्मनी और जापान की नीतियों और रूस के विरोध के चलते इस मुहिम में दरारें साफ दिखने लगी हैं। इसके अलावा, 'यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस' (UfC) जैसे विरोधी समूह नए स्थायी सदस्यों के बजाय केवल गैर-स्थायी सीटें बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।
सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य हैं, जिनमें अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन 5 स्थायी सदस्य हैं और इन सभी के पास वीटो पावर है। इसके अलावा 10 गैर-स्थायी सदस्य दो साल के कार्यकाल के लिए चुने जाते हैं। UNSC के स्वरूप को बदलने के लिए यूएन चार्टर में संशोधन करना होगा, जिसके लिए महासभा में दो-तिहाई बहुमत के साथ-साथ सभी पांचों मौजूदा स्थायी सदस्यों की मंजूरी अनिवार्य है।
इस पूरी प्रक्रिया में चीन का विरोधी रुख भारत की राह में सबसे बड़ी रुकावट बना हुआ है, क्योंकि बीजिंग रणनीतिक मतभेदों के चलते कभी भी भारत के पक्ष में नहीं रहा है। साथ ही, नए सदस्यों को वीटो पावर मिलेगी या नहीं और अफ्रीकी देशों की हिस्सेदारी का मुद्दा जैसे जटिल सवाल आज भी अनसुलझे हैं। 1990 के दशक से उठ रही भारत की इस मांग पर 2026 में भी बातचीत जारी है, लेकिन वैश्विक सहमति न बन पाने के कारण यह मामला अब भी अटका हुआ है। ऐसे में रूस का यह समर्थन भारत के लिए कूटनीतिक रूप से बेहद अहम साबित हुआ है, जबकि जापान और जर्मनी के रुख ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
Location : New Delhi
Published : 27 September 2026, 11:07 AM IST
Topics : India Permanent Seat India UN Diplomacy Japan Germany G4 United Nations Security Council UNSC