Nepal Flood: 2 लाख टन मलबा और 1000 से ज्यादा मौतें, नेपाल में ग्लेशियर फटने से आई सदी की सबसे भयंकर तबाही

नेपाल की भोटे कोशी और त्रिशूली नदी में ग्लेशियर फटने से आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड से भारी तबाही हुई है।

Post Published By: Priyam Kashyap
Updated : 2 September 2026, 3:31 PM IST

New Delhi: नेपाल में भोटे कोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों में अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम (UNDP) की एक शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ और मलबे के बहाव से प्रभावित इलाकों में लगभग 22 लाख टन मलबा जमा हो गया है। इस मलबे में नष्ट हुई इमारतें, चट्टानें, गाद, पेड़-पौधे और घरेलू सामान शामिल हैं।

आपदा से 84,000 से ज्यादा लोग प्रभावित

रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल की 17 नगर पालिकाओं में रहने वाले 84,270 से ज्यादा लोग इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुए हैं। अचानक आई बाढ़ ने कई इलाकों में घरों, सड़कों और जरूरी बुनियादी ढांचों को नष्ट कर दिया है।

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हजारों लोग अभी भी लापता

हिमालयी क्षेत्र में आई इस विनाशकारी बाढ़ में 1,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है, जबकि 4,800 से ज्यादा लोगों के लापता होने की खबर है। मरने वालों में कई विदेशी नागरिक और भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर फटने और उसके बाद भारी मलबे के साथ पानी के तेज बहाव को इस आपदा का मुख्य कारण माना जा रहा है।

सीमा चौकियां और बाजार मलबे में दबे

बाढ़ ने रसुवागढ़ी सीमा चौकी, बेट्रावती बाजार और तिमुरे शहर को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई इलाकों में जमा मलबे की मोटी परतें राहत और बचाव कार्यों में बाधा डाल रही हैं।

पनबिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान

रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिलों में कुल 13 पनबिजली परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं जिनमें 8 चालू प्लांट और 5 निर्माणाधीन प्लांट शामिल हैं, जिनकी कुल क्षमता 354 मेगावाट है। इससे नेपाल की बिजली उत्पादन क्षमता का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हुआ है।

सेना और राहत टीमों द्वारा बचाव कार्य जारी

नेपाली सेना और सुरक्षा बल हेलीकॉप्टर, बुलडोजर और अन्य संसाधनों का इस्तेमाल करके राहत और बचाव कार्य चला रहे हैं। दलदली इलाकों में फंसे लोगों को बचाने और मलबा हटाने की कोशिशें जारी हैं।

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भारत ने मदद का हाथ बढ़ाया

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने लोगों के विस्थापन और साफ पानी व साफ-सफाई की सेवाओं में रुकावट के कारण संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका पर चिंता जताई है। इस बीच, अपनी 'नेबरहुड फर्स्ट' (पड़ोसी पहले) नीति के तहत भारत ने नेपाल में राहत सामग्री, मेडिकल टीमें और विशेषज्ञ भेजे हैं। साथ ही, उस इलाके में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभियान भी चलाया जा रहा है।

Location :  New Delhi

Published :  2 September 2026, 3:31 PM IST