इजरायल-अमेरिका के साथ जारी युद्ध के 21 दिन बाद ईरान ने बड़ा और खतरनाक ऐलान किया है। तेहरान ने कहा है कि अब दुनिया भर के पर्यटन और मनोरंजन स्थल भी सुरक्षित नहीं रहेंगे। साथ ही उसने दावा किया कि युद्ध के बीच भी उसकी मिसाइल निर्माण क्षमता बरकरार है, जिससे वैश्विक सुरक्षा और तेल बाजार को लेकर चिंता और बढ़ गई है।

ईरान ने दी नई धमकी (Image Source: Google)
New Delhi: इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध अब एक नए और ज्यादा खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। युद्ध के करीब तीन हफ्ते बाद शुक्रवार, 20 मार्च को ईरान ने संकेत दिया कि वह अपनी हमले की रणनीति को और व्यापक बना सकता है।
सूत्रों के मुताबिक ईरान के वरिष्ठ सैन्य प्रवक्ता जनरल अबोलफज़्ल शेकारची ने चेतावनी दी कि तेहरान के दुश्मनों के लिए दुनिया भर में पार्क, मनोरंजन क्षेत्र और पर्यटन स्थल सुरक्षित नहीं रहेंगे। इसी के साथ ईरान ने यह भी दावा किया कि लगातार हमलों के बावजूद उसकी मिसाइल उत्पादन क्षमता खत्म नहीं हुई है और वह युद्ध की स्थिति में भी मिसाइलें बना रहा है।
ईरान की यह चेतावनी इसलिए ज्यादा गंभीर मानी जा रही है क्योंकि इससे संघर्ष का दायरा मध्य पूर्व से बाहर भी फैलने की आशंका बन गई है। ईरान ने सीधे किसी खास शहर या देश का नाम नहीं लिया, लेकिन जिस तरह पर्यटन स्थल, मनोरंजन क्षेत्र और पार्क जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया, उससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।
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यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और इजरायल लगातार दावा कर रहे हैं कि उनके हमलों ने ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचाया है। इसके जवाब में ईरान ने साफ संकेत देने की कोशिश की है कि उसकी जवाबी ताकत अभी भी बरकरार है।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया था कि ईरान की नौसेना, वायुसेना और बैलिस्टिक मिसाइल उत्पादन क्षमता को करारा झटका लगा है। लेकिन ईरान ने इस दावे को खारिज कर दिया। जानकारी के अनुसार, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े बयानों में कहा गया कि देश युद्ध की स्थिति में भी मिसाइलें बना रहा है और उसके भंडार को लेकर कोई बड़ी समस्या नहीं है। इस दावे ने यह साफ कर दिया कि तेहरान सैन्य दबाव के बावजूद झुकने के मूड में नहीं है। यही वजह है कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर तनाव कम होने के बजाय और बढ़ता दिख रहा है।
ईरान की आक्रामक रणनीति का असर खाड़ी क्षेत्र में साफ दिख रहा है। जानकारी के अनुसार शुक्रवार को कुवैत की मीना अल-अहमदी रिफाइनरी पर फिर ड्रोन हमला हुआ, जिससे वहां आग लग गई। इससे पहले भी इसी रिफाइनरी पर हमला हुआ था। बहरीन और सऊदी अरब ने भी अपने यहां हमलों या ड्रोन इंटरसेप्शन की जानकारी दी है। इन हमलों का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा है, क्योंकि यह पूरा इलाका तेल और गैस सप्लाई के लिहाज से बेहद अहम है। इस संघर्ष ने मध्य पूर्व की ऊर्जा अवसंरचना पर बड़ा दबाव बनाया है और दुनिया भर में तेल-गैस कीमतों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
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कुल मिलाकर, ईरान का यह नया बयान सिर्फ युद्ध की भाषा नहीं, बल्कि एक बड़े रणनीतिक संदेश की तरह देखा जा रहा है। एक तरफ वह यह जताना चाहता है कि उसकी सैन्य क्षमता अभी खत्म नहीं हुई, दूसरी तरफ उसने ऐसे प्रतीकात्मक और संवेदनशील स्थानों का जिक्र किया है जिनका सीधा संबंध आम लोगों की सुरक्षा से है। यही वजह है कि यह संघर्ष अब सिर्फ सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि वैश्विक सुरक्षा, पर्यटन और अर्थव्यवस्था के लिए भी नई चुनौती बनता जा रहा है।