सीजफायर से पहले ही टूटा भरोसा? ईरान ने अमेरिका पर लगाए गंभीर आरोप

ईरान और अमेरिका के कथित सीजफायर समझौते पर नया विवाद खड़ा हो गया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के दावे को अमेरिका और इजरायल ने खारिज कर दिया है।

Post Published By: सौम्या सिंह
Updated : 9 April 2026, 8:38 AM IST

New Delhi: ईरान और अमेरिका के बीच कथित सीजफायर समझौते को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के दावे पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। खासकर लेबनान को लेकर दिए गए बयान ने स्थिति को और उलझा दिया है।

शहबाज शरीफ के बयान से शुरू हुआ विवाद

दरअसल, शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया था कि ईरान, अमेरिका और उसके सहयोगी देशों सहित लेबनान ने दो हफ्तों के युद्धविराम पर सहमति बना ली है। लेकिन इस बयान को जल्द ही व्हाइट हाउस ने खारिज कर दिया। अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट किया कि लेबनान इस समझौते का हिस्सा कभी था ही नहीं।

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लेबनान में जारी हमलों से बढ़ा तनाव

सीजफायर की घोषणा के बावजूद इजरायल द्वारा लेबनान में हिजबुल्लाह ठिकानों पर हमले जारी रहे। इससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। इसके जवाब में ईरान ने रणनीतिक कदम उठाते हुए स्ट्रेट ऑफ होरमुज को फिर से बंद कर दिया, जिससे वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई।

ईरान का अमेरिका पर सीधा दबाव

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने खुलकर अमेरिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अमेरिका को तय करना होगा कि वह वास्तव में सीजफायर लागू करना चाहता है या इजरायल के माध्यम से संघर्ष जारी रखना चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया लेबनान में हो रही हिंसा को देख रही है और अमेरिका की विश्वसनीयता दांव पर है।

इजरायल और अमेरिका ने किया साफ

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी स्पष्ट कर दिया कि लेबनान इस सीजफायर समझौते का हिस्सा नहीं है। वहीं व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ने भी यही दोहराया कि समझौता सीमित दायरे में था और इसमें लेबनान को शामिल नहीं किया गया था।

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ईरान संसद का बड़ा आरोप

ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बातचीत शुरू होने से पहले ही प्रस्ताव के तीन महत्वपूर्ण बिंदुओं का उल्लंघन हो चुका है। इनमें लेबनान में सीजफायर लागू न होना, ईरान में ड्रोन हमले की कोशिश और यूरेनियम संवर्धन के अधिकार को न मानना शामिल है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान ने गलत जानकारी दी या अमेरिका ने आखिरी समय में अपनी शर्तें बदल दीं।

Location :  New Delhi

Published :  9 April 2026, 8:38 AM IST