
जंग की आग में झुलसता ईरान
New Delhi: धमाकों की गूंज, आसमान में मंडराते ड्रोन और हर तरफ पसरा डर ईरान इस वक्त सिर्फ जंग नहीं, बल्कि एक गहरे मानवीय संकट की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं जहां आम लोग न सिर्फ हमलों से जूझ रहे हैं, बल्कि भूख और प्यास जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं। आरोप-प्रत्यारोप के बीच हालात और बिगड़ते जा रहे हैं।
मध्य पूर्व में तनाव तेजी से बढ़ रहा है। डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच टकराव एक बार फिर सुर्खियों में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रणनीतिक जलमार्गों और तेल आपूर्ति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है, जिससे हालात युद्ध जैसे बन गए हैं। दूसरी तरफ, ईरान ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए इज़राइल और खाड़ी देशों पर हमले तेज कर दिए हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है।
बताया जा रहा है कि ईरान ने बहरीन और कुवैत के पेट्रोकेमिकल ठिकानों को निशाना बनाते हुए ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। इन हमलों को एक स्पष्ट संदेश के तौर पर देखा जा रहा है कि ईरान किसी दबाव में झुकने को तैयार नहीं है। इसके साथ ही राजधानी तेल अवीव पर हमले की खबरों ने हालात को और विस्फोटक बना दिया है।
ईरान ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी तरह के सीजफायर दबाव को स्वीकार नहीं करेगा। इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। वहीं डोनाल्ड ट्रंप के रुख को लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं कि अमेरिका इस संकट में और सख्त कदम उठा सकता है।
इस पूरे संघर्ष का सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। ईरान में हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक खाने-पीने की चीजों की कीमतें आसमान छू रही हैं। एक किलो आटे की कीमत 72,000 से 93,000 ईरानी रियाल तक पहुंच गई है। चिकन और मटन जैसे जरूरी प्रोटीन भी आम लोगों की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं। ईरान में ब्रेड मुख्य भोजन है, लेकिन आटे की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के कारण लोगों को लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ रहा है।
लगातार हमलों और युद्ध जैसे हालातों के चलते ईरान में करीब 90 हजार घर तबाह होने की खबर है। हजारों परिवार बेघर हो चुके हैं और राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। बिजली, पानी और जरूरी सेवाओं पर भी असर पड़ा है, जिससे लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं।
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इरान में इस समय भीषण पेय जल संकट है। राजधानी तेहरान में 10 मिलयन से अधिक लोगों के लिए कुछ दिनों के लिए हा पीनी बचा है। आधे दशक से देश में सूखे की स्थिति बनी हुई है। बारिश में 45% की कमी आई है। जिससे जलासय और बांधों में जल न्यूनतम स्थर पर पहुच गया है।
Location : New Delhi
Published : 6 April 2026, 4:06 PM IST