मध्य-पूर्व में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी युद्ध सातवें दिन में पहुंच गया है। भारी हमलों से ईरान को नुकसान हुआ है। इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि खामेनेई के बाद नए नेता के चयन में उनकी भूमिका होगी और गैस कीमतों पर भी बयान दिया।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Img- Internet)
Washington: मध्य-पूर्व में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी युद्ध अब सातवें दिन में पहुंच गया है। बीते छह दिनों में ईरान के कई सैन्य ठिकानों और रणनीतिक स्थानों को भारी नुकसान पहुंचा है। लगातार हवाई हमलों और जवाबी कार्रवाई के कारण पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर है। इस बीच कई देशों ने हालात को लेकर चिंता जताई है और युद्ध जल्द खत्म करने की अपील की है। ऐसे में ट्रंप ने गैस की बढ़ती कीमतों पर एक बड़ा बयान जारी किया है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध के बीच एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान में सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के बाद नए नेता का चयन होता है तो उसमें उनकी सीधी भूमिका होगी। ट्रंप के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। कई विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान ईरान पर राजनीतिक दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
युद्ध के कारण वैश्विक तेल और गैस बाजार में भी हलचल देखी जा रही है। हालांकि ट्रंप ने कहा कि उन्हें अमेरिका में गैसोलीन की कीमतों के बढ़ने की चिंता नहीं है। रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अगर कीमतें थोड़ी बढ़ती भी हैं तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा से ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं है। उन्होंने भरोसा जताया कि जैसे ही युद्ध खत्म होगा, ऊर्जा की कीमतें तेजी से नीचे आ जाएंगी।
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अमेरिकी सेना ने शुक्रवार सुबह दावा किया कि उसने ईरान के एक ड्रोन कैरियर पर हमला किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया पर एक ब्लैक-एंड-व्हाइट वीडियो जारी किया, जिसमें ईरानी नेवी के जहाज IRIS शाहिद बाघेरी पर कई हमले होते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में जहाज पर आग लगती भी दिखाई देती है। सेंट्रल कमांड ने कहा कि अमेरिकी सेना अपने मिशन से पीछे नहीं हटेगी और जरूरत पड़ने पर ईरान की नौसेना को पूरी तरह निष्क्रिय करने की कार्रवाई जारी रहेगी।
ईरान में तबाही (Img- Internet)
ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें भरोसा है कि होर्मुज स्ट्रेट खुला रहेगा, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक माना जाता है। उनका कहना है कि ईरान की नौसेना अब इतनी मजबूत स्थिति में नहीं है कि वह इस जलमार्ग को लंबे समय तक बाधित कर सके।
इस पूरे संघर्ष के बीच रूस ने भी बड़ा बयान दिया है। रूस ने यूरोप को चेतावनी दी है कि अगर ईरान के साथ चल रहा युद्ध जल्द खत्म नहीं होता तो वह यूरोप को गैस सप्लाई रोक सकता है। रूस की इस चेतावनी ने यूरोप में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
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भारत भी इस संकट पर करीबी नजर रख रहा है। भारत ने खामेनेई के निधन पर शोक व्यक्त किया और विदेश सचिव ने दिल्ली में ईरान के राजदूत से मुलाकात कर हालात पर चर्चा की। भारत की कोशिश है कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनी रहे और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित न हो।