
8 अगस्त को मनाया जा रहा अंतर्राष्ट्रीय बिल्ली दिवस (Img: AI Generated Image)
New Delhi: बिल्ली का नाम सुनते ही किसी के दिमाग में घर में घूमती प्यारी सी पालतू बिल्ली आती है, तो किसी को बचपन से सुनी वह बात याद आती है कि बिल्ली रास्ता काट दे तो कुछ देर रुक जाना चाहिए। भारत समेत कई समाजों में बिल्लियों को लेकर तरह-तरह की मान्यताएं हैं। लेकिन दुनिया के कई हिस्सों में तस्वीर इसके बिल्कुल उलट है।
कहीं बिल्लियां शहर की पहचान बन चुकी हैं, कहीं उन्हें धार्मिक नजरिए से सम्मान मिलता है और कहीं उनके लिए बाकायदा लोग खाने-पानी और रहने का इंतजाम करते हैं। यही वजह है कि इंटरनेशनल कैट डे सिर्फ बिल्ली प्रेमियों के लिए फोटो खिंचाने या उन्हें प्यार करने का दिन नहीं है, बल्कि उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा और बेहतर जीवन को लेकर जागरूकता फैलाने का मौका भी है।
हर साल 8 अगस्त को इंटरनेशनल कैट डे मनाया जाता है। इस दिवस की शुरुआत 2002 में International Fund for Animal Welfare यानी IFAW ने की थी। इसका मकसद बिल्लियों की जरूरतों और उनके कल्याण को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाना था। साल 2020 में इस दिवस की देखरेख International Cat Care को सौंप दी गई।
इस दिन का संदेश काफी सीधा है- बिल्लियां चाहे पालतू हों, आवारा हों या इंसानों से दूरी बनाकर रहने वाली हों, उनकी जरूरतों को समझना और उनके साथ जिम्मेदारी से पेश आना जरूरी है।
एक ही बिल्ली, लेकिन नजरिया बिल्कुल अलग (Img: Pinterest)
International Cat Care के मुताबिक, दुनिया में बड़ी संख्या में ऐसी बिल्लियां भी हैं जिनका कोई स्थायी मालिक नहीं है। यानी घर में आराम से रहने वाली बिल्ली की तस्वीर देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर बिल्ली की जिंदगी उतनी ही आसान है।
इंसानों और बिल्लियों का रिश्ता आज का नहीं है। बिल्लियों का इंसानों के साथ जुड़ाव हजारों साल पुराना माना जाता है। जब इंसानों ने खेती और अनाज जमा करना शुरू किया, तब चूहों जैसे छोटे जीवों से अनाज को बचाने में बिल्लियां उपयोगी साबित हुईं।
धीरे-धीरे यह रिश्ता सिर्फ जरूरत तक सीमित नहीं रहा। बिल्लियां इंसानी बस्तियों के आसपास रहने लगीं और फिर कई जगहों पर घरों का हिस्सा बन गईं।
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प्राचीन मिस्र में तो बिल्लियों को खास धार्मिक महत्व हासिल था। देवी बासेट को अक्सर बिल्ली या बिल्ली के सिर वाली महिला के रूप में दिखाया जाता था। पुरातात्विक साक्ष्यों में बिल्लियों के ममीकरण और उन्हें इंसानों के साथ दफन किए जाने के प्रमाण भी मिले हैं।
अब कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा भारत से जुड़ा है। कर्नाटक के मांड्या जिले का बेक्कालेले गांव बिल्लियों को लेकर अपनी अनोखी परंपरा के लिए जाना जाता है। यहां बिल्ली को देवी मंगम्मा का रूप माना जाता है और स्थानीय लोगों की धार्मिक मान्यता के अनुसार उसकी पूजा की जाती है। गांव में बिल्लियों से जुड़े कई मंदिर भी बताए जाते हैं।
स्थानीय मान्यता के मुताबिक, देवी मंगम्मा ने बिल्ली का रूप लेकर गांव में प्रवेश किया था और लोगों की रक्षा की थी। इसी विश्वास से जुड़ी एक कहानी यह भी कहती है कि उनके गायब होने के बाद उसी स्थान पर एक बांबी दिखाई दी थी।
अंतर्राष्ट्रीय बिल्ली दिवस (Img: Pinterest)
इस गांव का नाम भी कन्नड़ शब्द ‘बेक्कू’ से जुड़ा बताया जाता है, जिसका अर्थ बिल्ली होता है। यहां बिल्ली को नुकसान पहुंचाना बेहद गंभीर बात मानी जाती है। यानी जिस जानवर को कुछ जगहों पर रास्ता काटने के कारण अशुभ समझ लिया जाता है, उसी बिल्ली को इस गांव में देवी का रूप मानकर सम्मान दिया जाता है।
अगर बिल्ली प्रेम की बात हो और इस्तांबुल का नाम न आए, तो कहानी अधूरी रह जाती है। तुर्की का इस्तांबुल लंबे समय से अपनी गलियों में घूमने वाली बिल्लियों के लिए मशहूर है। यहां बिल्लियां दुकानों, कैफे, सीढ़ियों, खिड़कियों और ऐतिहासिक इलाकों में आसानी से दिखाई देती हैं। स्थानीय लोग अक्सर उन्हें खाना और पानी देते हैं और उनके लिए छोटे आश्रय तक बनाते हैं।
शहर में बिल्लियों और इंसानों का यह साथ कई सदियों पुराना है। एक समय बिल्लियां चूहों को नियंत्रित करने में भी मदद करती थीं। आज वे इस्तांबुल की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन चुकी हैं। इसी वजह से इस्तांबुल को अक्सर ‘City of Cats’ भी कहा जाता है। वहां आने वाले पर्यटकों के लिए शहर की बिल्लियां कई बार मशहूर इमारतों और बाजारों जितना ही आकर्षण बन जाती हैं।
अंतर्राष्ट्रीय बिल्ली दिवस (Img: Pinterest)
बिल्लियों के साथ समय बिताने को कई लोग सुकून देने वाला अनुभव मानते हैं। उनकी शांत चाल, मुलायम फर और अपने अंदाज में लोगों के पास आना मन को अच्छा महसूस करा सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर बिल्ली को गोद में उठाना या छूना पसंद होगा। इंटरनेशनल कैट डे का एक अहम संदेश यही है कि बिल्ली को सिर्फ अपनी पसंद के हिसाब से नहीं, बल्कि उसकी जरूरत और स्वभाव के हिसाब से समझना चाहिए। International Cat Care भी बिल्लियों की व्यक्तिगत जरूरतों को समझने पर जोर देता है।
इंटरनेशनल कैट डे पर किसी बिल्ली को सिर्फ दूध पिला देना ही काफी नहीं है। अगर आपके आसपास आवारा बिल्लियां हैं तो उनके लिए साफ पानी रखना, सुरक्षित तरीके से खाना देना और जरूरत पड़ने पर पशु चिकित्सक या स्थानीय पशु सहायता संगठन से संपर्क करना ज्यादा उपयोगी कदम हो सकता है।
किसी बिल्ली को अपनाने से पहले उसकी जिम्मेदारी, खर्च और उसकी जरूरतों को समझना भी जरूरी है। सिर्फ सोशल मीडिया पर प्यारी तस्वीर देखकर पालतू जानवर घर लाना सही फैसला नहीं है।
Location : New Delhi
Published : 8 August 2026, 1:35 PM IST