वीजा नीतियों का कड़ा असर, अमेरिका में सब कुछ समेटकर भारत लौटने को मजबूर हुए टेक एक्सपर्ट्स

अमेरिका में सख्त वीजा नीतियों, छंटनी और ग्रीन कार्ड के लंबे इंतजार से परेशान होकर भारतीय टेक पेशेवर अब सब कुछ छोड़कर स्वदेश लौट रहे हैं। विदेशों में चमकने वाला अमेरिकी सपना अब एक बड़ा संकट बनता जा रहा है।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 12 October 2026, 4:27 PM IST
google-preferred

Washington: कभी समंदर पार जाकर डॉलर कमाने और लग्जरी जिंदगी जीने का सपना देखने वाले भारतीय टेक प्रोफेशनल्स के लिए हालात अब तेजी से बदल रहे हैं। अमेरिका में पिछले कुछ समय से चल रही छंटनी, वीज़ा नियमों की सख्ती और अचानक बदले हालात ने हजारों युवाओं को हिला कर रख दिया है।

स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि कई परिवारों के लिए वहां टिके रहना नामुमकिन सा हो गया है, जिसके चलते वे अपने वर्षों के अमेरिकी सपने को बीच में ही छोड़कर भारत वापस लौटने को मजबूर हो रहे हैं।

कागजी दस्तावेजों और ग्रीन कार्ड का लंबा इंतजार

इस पलायन के पीछे सबसे बड़ा कारण एच-1बी वीज़ा की कड़ी शर्तें और ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का अनिश्चित काल के लिए रोकना है। अमेरिकी प्रशासन द्वारा आउटसोर्सिंग कंपनियों और टेक सेक्टर पर कसे जा रहे शिकंजे के कारण भारतीयों का परमानेंट रेजीडेंसी का इंतजार दशकों लंबा हो गया है।

नियम के मुताबिक वीज़ा छूटने के बाद सिर्फ 60 दिनों के भीतर नई नौकरी ढूंढना लोहे के चने चबाने जैसा है, जिससे मानसिक तनाव और कानूनी अनिश्चितताएं चरम पर पहुंच चुकी हैं।

अमेरिकी अदालत का डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन पर बड़ा प्रहार, टैक्सपेयर्स के पैसों से बनने वाले विज्ञापनों पर लगी रोक

घर और गाड़ियां छोड़कर लौटने की बेबसी

संकट इतना गहरा है कि कई टेक प्रोफेशनल्स के पास अपनी संपत्ति बेचने या हिसाबकिताब बराबर करने तक का समय नहीं बचा है। हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे शहरों में लौटे युवाओं का कहना है कि उन्होंने अमेरिका में जो घर खरीदे थे, वे मार्केट में मंदी के कारण बिक नहीं पाए और वे अपने फर्नीचर, गाड़ियां व अन्य सामान वहीं छोड़कर या कौड़ियों के दाम कबाड़ में देकर रातों-रात भारत की उड़ान भरने को विवश हुए हैं। वहां की जिंदगी अब जीने लायक नहीं बल्कि सिर्फ गुजारा करने का जरिया बनकर रह गई थी।

भारतीय टेक सेक्टर में उम्मीद की नई किरण

एक तरफ जहां अमेरिका में भारतीय प्रोफेशनल्स पर मुसीबतों का पहाड़ टूट रहा है, वहीं दूसरी तरफ देश के भीतर स्थिति तेजी से बदल रही है। भारत का टेक सेक्टर और स्टार्टअप इकोसिस्टम आज दुनिया के सबसे मजबूत बाजारों में शुमार हो चुका है।

पुतिन से तेल सौदे के साथ ट्रंप का दोहरा चरित्र बेनकाब; डॉन बेकन समेत कई सांसद ट्रंप के खिलाफ

वापस लौट रहे इंजीनियरों का मानना है कि अब अपने परिवार के बीच भारत में रहकर काम करना न केवल मानसिक रूप से शांतिपूर्ण है, बल्कि यहां करियर ग्रोथ के भी असीम और सुरक्षित अवसर तेजी से पैदा हो रहे हैं।

Location :  Washington

Published :  12 October 2026, 4:27 PM IST

Related News

Advertisement