आसमान से समुद्र तक वार, इन 23 हाईटेक हथियारों के दम पर ईरान पर चढ़ा अमेरिका

ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत अमेरिका ने पहले 24 घंटों में ईरान के 1000 से ज्यादा ठिकानों पर हमला किया। B-2 बॉम्बर, MQ-9 रीपर, F-22, F-35, पैट्रियट और THAAD समेत 23 हथियार सिस्टम का इस्तेमाल हुआ। नौसेना, मिसाइल साइट्स और कमांड सेंटर निशाने पर रहे।

Post Published By: सौम्या सिंह
Updated : 2 March 2026, 1:18 PM IST

Washington: अमेरिका ने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत पहले 24 घंटों में ईरान पर बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (United States Central Command) यानी CENTCOM ने एक ग्राफिक जारी कर बताया कि इस अभियान में 23 प्रमुख हथियार सिस्टम का इस्तेमाल किया गया। इन हमलों में बैलिस्टिक मिसाइल साइट्स, एयर डिफेंस सिस्टम, नौसेना जहाज, कमांड सेंटर और आईआरजीसी ठिकानों सहित 1000 से ज्यादा लक्ष्यों को निशाना बनाया गया।

स्टेल्थ बॉम्बर और ड्रोन से सटीक प्रहार

अभियान में सबसे प्रमुख भूमिका B-2 Spirit स्टेल्थ बॉम्बर की रही, जिसने लंबी दूरी तय कर ईरान की अंडरग्राउंड बैलिस्टिक मिसाइल साइट्स पर 2000 पाउंड के गाइडेड बम गिराए। इसके साथ ही MQ-9 Reaper ड्रोन का उपयोग सटीक हमलों के लिए किया गया, जो लंबे समय तक हवा में रहकर लेजर गाइडेड मिसाइलें दाग सकता है।

अमेरिका ने पहली बार LUCAS (Low-Cost Unmanned Combat Aerial System) स्टेल्थ ड्रोन का भी इस्तेमाल किया। यह कम लागत वाला एक-तरफा अटैक ड्रोन है, जिसे ईरान के शाहेद-136 जैसे ड्रोन के जवाब में विकसित किया गया है।

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एयर डिफेंस और इंटरसेप्टर सिस्टम तैनात

ईरान की संभावित जवाबी कार्रवाई को देखते हुए अमेरिका ने MIM-104 Patriot और THAAD जैसे एंटी-मिसाइल सिस्टम तैनात किए। पैट्रियट सिस्टम ने मिसाइल और ड्रोन खतरों को रोकने का काम किया, जबकि THAAD को लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के खिलाफ लगाया गया।

फाइटर जेट्स और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर

इस ऑपरेशन में F-22 Raptor और F-35 Lightning II जैसे अत्याधुनिक स्टेल्थ फाइटर जेट्स शामिल रहे, जिन्होंने एयर सुपीरियरिटी स्थापित करने और ईरानी एयर डिफेंस को कमजोर करने में भूमिका निभाई। इसके अलावा F/A-18 Super Hornet को एयरक्राफ्ट कैरियर से लॉन्च किया गया।

अत्याधुनिक स्टेल्थ फाइटर जेट्स शामिल (फोटो सोर्स- इंटरनेट)

इलेक्ट्रॉनिक अटैक के लिए EA-18G Growler का इस्तेमाल हुआ, जिसने दुश्मन के रडार और कम्युनिकेशन सिस्टम को जाम किया। A-10 थंडरबोल्ट II और F-16 जैसे जेट्स ने ग्राउंड अटैक और एयर स्ट्राइक मिशन संभाले।

समुद्री और रॉकेट सिस्टम की भूमिका

समुद्री मोर्चे पर P-8 Poseidon ने होर्मुज स्ट्रेट में ईरानी नौसेना की गतिविधियों पर नजर रखी। वहीं M142 HIMARS रॉकेट सिस्टम ने जमीनी लक्ष्यों पर सटीक हमले किए। गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स से टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें दागी गईं।

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लॉजिस्टिक्स और सपोर्ट सिस्टम

अभियान के दौरान C-17 Globemaster III और C-130 हर्क्यूलिस जैसे ट्रांसपोर्ट विमानों ने सैनिकों और हथियारों की आपूर्ति सुनिश्चित की। KC-135 और KC-46 जैसे टैंकर विमानों ने हवा में ईंधन भरकर B-2 और अन्य फाइटर जेट्स की लंबी उड़ान संभव बनाई।

न्यूक्लियर-पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर्स, जैसे USS Abraham Lincoln, से F-18 और F-35 जेट्स लॉन्च किए गए। काउंटर-ड्रोन सिस्टम भी सक्रिय रहे।

गुप्त क्षमताएं और संयुक्त अभियान

CENTCOM ने संकेत दिया कि ऑपरेशन में कुछ विशेष क्षमताएं भी शामिल हैं, जिनका खुलासा सुरक्षा कारणों से नहीं किया गया। माना जा रहा है कि इनमें साइबर और स्पेस आधारित ऑपरेशन शामिल हो सकते हैं।

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  • Washington

Published : 
  • 2 March 2026, 1:18 PM IST