
अभिनेता संजय दत्त का जन्मदिन (Img: AI Generated Image)
Mumbai: बॉलीवुड की इस रंगीन दुनिया को बाहर से देखने वाला हर शख्स अक्सर यही सोचता है कि बड़े सितारों की जिंदगी में सिवाय चमक-दमक और ऐश-ओ-आराम के कुछ नहीं होता। किसी मशहूर स्टार के घर जन्म लेने वाले बच्चे को तो लोग वैसे ही किस्मत का धनी मान लेते हैं। लेकिन इस जगमगाती इंडस्ट्री का एक सच ऐसा भी है, जिसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए। संजय दत्त की जिंदगी उसी अंधेरे और उजाले के बीच झूलती एक ऐसी दास्तान है, जिसे जीना किसी आम इंसान के बस की बात नहीं थी।
उनकी कहानी सिर्फ स्टारडम की नहीं है; इसमें अपनों को खोने की टीस है, अपनी ही गलतियों से बर्बाद होने का पछतावा है और सलाखों के पीछे की वो खामोशी भी है जिसने उन्हें अंदर तक बदल दिया।
29 जुलाई 1959 को जब दिग्गज अभिनेता सुनील दत्त और नरगिस के घर किलकारी गूंजी, तो पूरे देश में खुशी की लहर दौड़ गई थी। उस दौर में अपने बेटे के नाम के लिए सुनील दत्त ने 'शमा' नाम की एक बेहद लोकप्रिय पत्रिका के माध्यम से अपने प्रशंसकों से राय मांगी थी। देश के कोने-कोने से हजारों फैंस ने खत भेजे और फिर इस नन्हे सितारे को नाम मिला- 'संजय बलराज दत्त'। सिर्फ 12 साल की उम्र में संजू ने अपने पिता की ही फिल्म 'रेश्मा और शेरा' में कव्वाली गाते एक छोटे से बच्चे का रोल करके पहली बार कैमरे का स्वाद चखा था।
संजू बचपन से ही बहुत ज्यादा मनमौजी और निडर थे। एक बार खेलते-खेलते उनके हाथ पिता की लाइसेंसी पिस्टल लग गई। नादानी में संजू का अंगूठा ट्रिगर पर दबा और धांय की आवाज के साथ घर की नौकरानी लहुलूहान होकर गिर पड़ी। खुशकिस्मती से नौकरानी की जान बच गई और दत्त परिवार ने उसका पूरा इलाज करवाया।
इसके बाद जब घर में होने वाली फिल्मी पार्टियों में संजू ने बड़े-बड़े कलाकारों को सिगरेट के कश खींचते देखा, तो वे चुपके से एशट्रे से सिगरेट के टुकड़े उठाकर पीने लगे। सुनील दत्त को जब इस बात का पता चला, तो उन्होंने संजू की जमकर कुटाई की। बेटे की लगातार बढ़ती शरारतों से परेशान होकर सुनील दत्त अपनी पारिवारिक मित्र और देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सलाह पर संजू को हिमाचल के मशहूर 'लॉरेंस स्कूल, सनावर' भेजा। पर संजू हॉस्टल की ऊंची दीवारें लांघकर अपने दोस्तों के साथ पास के जाबली गांव भाग जाते थे और देसी शराब व सिगरेट खरीदकर अपनी महफिल जमाते।
संजय दत्त की ब्लॉकबस्टर फिल्में (Img: AI Generated Image)
संजू की हरकतों पर नकेल कसने के लिए आखिरकार सुनील दत्त ने उन्हें खुद हीरो बनाकर लॉन्च करने की ठानी। साल 1981 में फिल्म ‘रॉकी’ से संजय दत्त का धमाकेदार डेब्यू होने जा रहा था। पूरे शहर में संजू के बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगे थे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। फिल्म के प्रीमियर से ठीक तीन दिन पहले कैंसर जैसी भयानक बीमारी ने उनकी मां नरगिस को उनसे हमेशा के लिए छीन लिया। मां की मौत के सदमे ने 22 साल के संजू को भीतर से तोड़कर रख दिया। इस असहनीय दर्द को भुलाने के लिए उन्होंने नशीली दवाओं का सहारा लिया और फिर धीरे-धीरे नशे के उस खौफनाक जाल में फंसते चले गए।
एक बार संजय दत्त ने शराब और ड्रग्स की इतनी भारी मात्रा एक साथ ले ली कि उनका शरीर जवाब दे गया। वे पूरे 2 दिन यानी 48 घंटे तक अपने कमरे में बेहोश पड़े रहे। जब उन्हें होश आया और उन्होंने शीशे में अपना सूखा हुआ चेहरा और डरावनी आंखें देखीं, तो वे खुद से ही डर गए। संजू रोते-बिलखते सीधे अपने पिता सुनील दत्त के कमरे में पहुंचे और बोले, "मुझे बचा लीजिए, मैं मरना नहीं चाहता।" सुनील दत्त ने बिना एक पल गंवाए उन्हें अमेरिका के नशा मुक्ति केंद्र भेज दिया।
रिहैब से नशामुक्त होकर जब संजय भारत लौटे, तो उनके लिए माहौल बहुत दर्दनाक था। लोग उन्हें देखते ही 'चरसी' या 'नशेड़ी' कहकर चिढ़ाते थे। इस जिल्लत ने संजू के अंदर एक आग भर दी। उन्होंने खुद को बदलने के लिए रात-दिन जिम में पसीना बहाना शुरू किया। भारी भरकम डंबल्स उठाकर उन्होंने एक ऐसी मस्कुलर बॉडी बनाई जिसने 90 के दशक में भारतीय सिनेमा में 'एक्शन हीरो' का पूरा दौर ही बदलकर रख दिया।
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संजू की निजी जिंदगी भी किसी उतार-चढ़ाव भरे ड्रामे से कम नहीं थी। अपनी पहली फिल्म ‘रॉकी’ की शूटिंग के दौरान उन्हें टीना मुनीम से मोहब्बत हुई, लेकिन उनकी नशे की लत की वजह से यह खूबसूरत रिश्ता टूट गया। इसके बाद 1987 में उन्होंने ऋचा शर्मा से शादी की और एक प्यारी बेटी त्रिशाला के पिता बने। मगर यहां भी खुशियों पर नजर लग गई और शादी के कुछ समय बाद ही ऋचा को ब्रेन ट्यूमर हो गया। महज 32 साल की उम्र में ऋचा इस दुनिया को अलविदा कह गईं। बाद में माधुरी दीक्षित के साथ उनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री और ऑफ-स्क्रीन नजदीकियों के किस्से भी उस दौर के अखबारों की सबसे बड़ी सुर्खियां बने।
हालांकि बाद में इसके बाद उनकी जिंदगी में रिया पिल्लई आई जिससे संजू ने 1998 में शादी भी की लेकिन ये रिश्ता भी ज्यादा लंबा नहीं चला और दोनों दो साल बाद ही अलग हो गए। कारण ये सामने आया की संजय रिया को समय नहीं देते थे जिसके चलते साल 2008 में दोनों का डाईवोर्स भी हो गया।
इसके बाद उनकी शादी में एंट्री हुई मान्यता की जिनके साथ संजू ने तीसरी शादी की। दोनों दो जुड़वा बच्चों के माता-पिता हैं। संजय दत्त की बायोपिक 'संजू' में उनकी लाइफ की स्टोरी को बाखूबी दिखाया गया है। संजय अपनी हाल ही में आई फिल्मों धुरंधर और धुरंध-2 से काफी चर्चा में आए, जिनमें उनके रोल को काफी पसंद किया गया।
Location : Mumbai
Published : 29 July 2026, 1:04 PM IST