किसका हंटर चला चंपत राय पर… वीएचपी का दबाव, पीएमओ की चेतावनी या योगी का खेल

राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। चर्चा है कि इसके पीछे VHP, PMO और योगी सरकार का दबाव रहा।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 26 June 2026, 2:52 PM IST

Ayodhya: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावे में कथित अनियमितता के मामले के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़ा बदलाव हुआ है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और कैश काउंटिंग व्यवस्था से जुड़े ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। इस फैसले के बाद अयोध्या से लेकर लखनऊ और दिल्ली तक सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। सवाल उठ रहा है कि आखिर चंपत राय जैसे लंबे समय से राम मंदिर आंदोलन से जुड़े चेहरे को पद छोड़ने की नौबत क्यों आई? क्या यह विश्व हिंदू परिषद (VHP) का दबाव था, पीएमओ की सख्ती या फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कोई बड़ा संदेश?

चढ़ावा विवाद के बाद बढ़ा दबाव

राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए जा रहे चढ़ावे को लेकर कथित गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद विवाद बढ़ गया था। आरोप लगाए गए कि दान पेटियों से निकलने वाली रकम और चढ़ावे की प्रक्रिया में अनियमितताएं हुईं। मामले की जांच शुरू हुई और कई लोगों पर कार्रवाई भी हुई। जांच के दौरान दान की रकम में कथित अंतर और कुछ कर्मचारियों की भूमिका सामने आने के बाद मामला गंभीर हो गया।

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PMO की सख्ती की चर्चा

सूत्रों के मुताबिक, विवाद सामने आने के बाद केंद्र स्तर पर भी मामले को गंभीरता से लिया गया। ट्रस्ट से चढ़ावे और संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड की जानकारी मांगे जाने की चर्चा सामने आई। इसके बाद मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया। ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और वित्तीय व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे। हालांकि आधिकारिक तौर पर पीएमओ की भूमिका को लेकर कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे दबाव के एक बड़े कारण के तौर पर देखा जा रहा है।

योगी के सख्त रुख से बढ़ी हलचल

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अयोध्या से जुड़े इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही थी। सरकार की ओर से साफ संदेश दिया गया कि आस्था से जुड़े किसी भी मामले में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके बाद यह चर्चा भी तेज हुई कि अयोध्या दौरे के दौरान चंपत राय को पहले की तरह प्रमुख स्थान नहीं मिला। इसे भी बदलाव के संकेत के तौर पर देखा गया।

SIT जांच में कई खुलासे

मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) ने भी जांच आगे बढ़ाई। जांच के दौरान दान पेटियों से जुड़े मामलों में कई लोगों पर कार्रवाई की गई। आरोप है कि नोटों की गिनती और चढ़ावे की प्रक्रिया में लगे कुछ कर्मचारियों ने रकम में हेराफेरी की। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह गड़बड़ी कितने समय से चल रही थी और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।

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VHP की भूमिका पर भी चर्चा

चंपत राय विश्व हिंदू परिषद से लंबे समय से जुड़े रहे हैं। राम मंदिर आंदोलन में उनकी अहम भूमिका रही है। शुरुआत में संगठन स्तर पर उनके समर्थन की चर्चा थी, लेकिन जैसे-जैसे मामला गंभीर होता गया, संगठन के रुख में बदलाव की बातें सामने आने लगीं। माना जा रहा है कि मामले की संवेदनशीलता और जांच की दिशा को देखते हुए उन्हें पद छोड़ने का संदेश दिया गया।

इस्तीफे के बाद उठे कई सवाल

चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ प्रशासनिक बदलाव है या फिर मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्था में बड़े सुधार की शुरुआत? फिलहाल जांच जारी है और आने वाले दिनों में कई और खुलासे हो सकते हैं। राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है, ऐसे में चढ़ावे से जुड़े विवाद ने पूरे मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है।

Location :  Ayodhya

Published :  26 June 2026, 2:52 PM IST