सब्जी विक्रेता से ‘करोड़पति ठेकेदार’ बनने का सफर, बिना अनुभव OEF में हासिल किए 129 टेंडर, CBI के रडार पर पूरा सिस्टम

फिरोजाबाद के हजरतपुर स्थित ऑर्डनेंस इक्विपमेंट फैक्ट्री में 12 करोड़ रुपये के टेंडर और रिश्वत घोटाले में नया मोड़ आया है। दो वरिष्ठ अधिकारियों के आपसी विवाद के बाद सीवीसी तक पहुंचे सबूतों के आधार पर सीबीआई ने पूर्व सीजीएम अमित सिंह समेत 10 लोगों पर 4 एफआईआर दर्ज की हैं।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 11 July 2026, 11:28 AM IST

Firozabad: रक्षा मंत्रालय के तहत आने वाली फिरोजाबाद के हजरतपुर स्थित ऑर्डनेंस इक्विपमेंट फैक्ट्री (OEF) में लगभग 12 करोड़ रुपये के टेंडर और रिश्वत के आरोपों से जुड़े मामले ने एक नया मोड़ ले लिया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, यह मामला किसी बाहरी एजेंसी के जरिए नहीं, बल्कि फैक्ट्री के दो वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हुए विवाद के बाद सामने आया। इस विवाद से मिली जानकारी अब केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई का आधार बन गई है।

अधिकारियों के बीच विवाद से अनियमितताओं का खुलासा

रिपोर्ट्स के मुताबिक, लगभग एक साल पहले फैक्ट्री में तैनात एक अधिकारी और तत्कालीन चीफ जनरल मैनेजर (CGM) अमित सिंह के बीच अनबन हो गई थी। इसके बाद, उस अधिकारी ने कथित फर्जी टेंडर, दक्षिण कोरिया की विदेशी यात्राओं और प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध निर्माण से जुड़े दस्तावेज और सबूत इकट्ठा किए और उन्हें सेंट्रल विजिलेंस कमीशन (CVC) और रक्षा मंत्रालय को सौंप दिया। शुरुआती जांच के बाद, CBI ने पूर्व CGM अमित सिंह समेत 10 लोगों के खिलाफ चार अलग-अलग FIR दर्ज की हैं।

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रिश्वत से अवैध निर्माण को बढ़ावा

CBI की चौथी FIR के अनुसार, एक चूड़ी व्यापारी पर फैक्ट्री की सुरक्षा सीमा के ठीक बगल में अवैध कंक्रीट की दीवार बनाने के लिए 30 लाख रुपये की रिश्वत देने का आरोप है। जांच में यह भी पता चला कि उसी प्रतिबंधित क्षेत्र में एक अन्य प्रभावशाली व्यवसायी की जमीन पर पक्का निर्माण किया गया था; एजेंसियां ​​इस पहलू की भी जांच कर रही हैं।

'डमी कॉन्ट्रैक्टर' के तौर पर करोड़ों के टेंडर हासिल करना

जांच में संतोष कुमार बघेल नाम के व्यक्ति को भी अहम माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह पहले फैक्ट्री परिसर में सब्जी और किराने का सामान बेचते थे। बाद में, अधिकारियों के साथ नजदीकियां बढ़ने पर उनकी फर्म M/s MSM Enterprises का इस्तेमाल कथित तौर पर 'डमी कॉन्ट्रैक्टर' के तौर पर किया गया। तकनीकी अनुभव या योग्यता न होने के बावजूद, उनकी फर्म ने 2020 और 2025 के बीच 129 टेंडर हासिल किए, जिनकी कुल अनुमानित कीमत लगभग 5.67 करोड़ रुपये थी।

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पूरा सिस्टम जांच के दायरे में

जांच एजेंसियों का मानना ​​है कि इस कथित मिलीभगत से कुछ लोगों को भारी आर्थिक फायदा हुआ। आरोप है कि इस दौरान शामिल व्यक्ति की आर्थिक स्थिति में तेजी से बदलाव आया; उसने एक नया, आलीशान घर बनाया, दो कारें खरीदीं और एक गाड़ी फैक्ट्री को किराए पर भी दी। फिलहाल, CBI इस मामले की गहन जांच कर रही है और आगे भी अहम खुलासे होने की उम्मीद है।

Location :  Firozabad

Published :  11 July 2026, 11:28 AM IST