
शिक्षक पर गिरी गाज (Image Source: Dynamite News)
Maharajganj: उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिले महराजगंज से एक बेहद हैरान करने वाला मामला प्रकाश में आया है, जहां कथित तौर पर नेपाली नागरिकता होने के बावजूद एक व्यक्ति भारत के सरकारी स्कूल में शिक्षक की नौकरी कर रहा है। इस गंभीर मामले के मीडिया में उजागर होने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) सुरजीत कुमार सिंह ने तत्काल संज्ञान लिया है और मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) निचलौल, आनंद मिश्रा को सौंपी गई है, जिन्हें जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट विभाग को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
पूरा मामला निचलौल क्षेत्र का है, जहां तैनात शिक्षक अयोध्या पटेल (पुत्र स्वर्गीय ऋषिकेश पटेल) वर्तमान में यहीं निवास करते हैं। हालांकि, चौंकाने वाली बात यह है कि उनका स्थायी पता नेपाल के नवलपरासी जनपद का बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं का दावा है कि शिक्षक के पास न सिर्फ नेपाल की नागरिकता है, बल्कि वहां का वैध वोटर आईडी कार्ड भी मौजूद है। आरोप है कि वह नियमित रूप से नेपाल की लोकतांत्रिक और मतदान प्रक्रियाओं में हिस्सा लेते रहे हैं, जो भारतीय नागरिकता और सेवा नियमावली के नियमों का सीधा उल्लंघन है।
इस मामले में एक नया और बेहद संवेदनशील मोड़ तब आया जब भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था देखने वाली खुफिया एजेंसियों और स्थानीय एलआईयू (Local Intelligence Unit) ने भी इस इनपुट पर अपनी आंतरिक जांच शुरू कर दी है। चूंकि मामला दो देशों की नागरिकता और भारत की आंतरिक सुरक्षा व सरकारी तंत्र में सेंधमारी से जुड़ा है, इसलिए खुफिया विभाग यह पता लगाने में जुट गया है कि आरोपी शिक्षक ने किस प्रकार और किन स्थानीय अधिकारियों की साठगांठ से भारतीय पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड और निवास प्रमाण पत्र तैयार करवाए। खुफिया रिपोर्ट भी जल्द ही शासन को भेजी जा सकती है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जैसे ही शिक्षा विभाग द्वारा जांच कमेटी गठित होने की भनक आरोपी शिक्षक अयोध्या पटेल को लगी, वह तुरंत हरकत में आ गए। चर्चा है कि वह आनन-फानन में नेपाल में मौजूद अपने नागरिकता संबंधी दस्तावेजों और मतदाता सूची से अपना नाम निरस्त कराने की जुगत में लग गए हैं ताकि कानूनी कार्रवाई से बच सकें। विभागीय स्तर पर अब इस बात की कड़ाई से जांच की जा रही है कि नियुक्ति के समय कौन-से दस्तावेज जमा किए गए थे और क्या वेरिफिकेशन प्रक्रिया में जानबूझकर तथ्यों को छुपाया गया था। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो शिक्षक की बर्खास्तगी के साथ-साथ उन पर धोखाधड़ी का मुकदमा भी दर्ज होना तय है।
Location : Maharajganj
Published : 23 June 2026, 1:00 PM IST