कहीं आप भी तो नहीं जुड़ रहे इस चेन से? वाराणसी पुलिस ने झांसा देने वाले हाईटेक गिरोह को किया बेनकाब

वाराणसी में बड़े जॉब रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। साइबर क्राइम पुलिस ने नौकरी का झांसा देकर करोड़ों की ठगी करने वाले अंतर-राज्यीय MLM गिरोह के मास्टरमाइंड समेत 19 लोगों को गिरफ्तार किया है। रोहनिया के ट्रेनिंग सेंटर से 300 युवक-युवतियों को मुक्त कराया गया। यह गिरोह 'महादेव एंटरप्राइजेज' नाम की फर्जी कंपनी बनाकर बेरोजगारों से वसूली करता था।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 11 July 2026, 12:00 PM IST

Varanasi: वाराणसी साइबर क्राइम पुलिस ने एक ऐसे अंतर-राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है जो मल्टी-लेवल मार्केटिंग (MLM) और पिरामिड स्कीम के जरिए लोगों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करता था। इस मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड समेत 19 लोगों को गिरफ्तार किया और रोहनिया स्थित एक ट्रेनिंग सेंटर से लगभग 300 युवक-युवतियों को सुरक्षित बाहर निकाला। शुरुआती जांच से पता चला है कि इस गिरोह ने एक हजार से ज्यादा बेरोजगार युवाओं को अपने जाल में फंसाया और उनसे करोड़ों रुपये ठगे।

नौकरी का लालच और वसूली का रैकेट

पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और पूर्वांचल क्षेत्र के युवाओं को नौकरी का झांसा देकर वाराणसी बुलाता था। वे उम्मीदवारों को ऑफिस के काम और डेटा एंट्री की भूमिकाओं के लिए 25,000 रुपये की मासिक सैलरी का लालच देते थे। वाराणसी पहुंचने पर, उम्मीदवारों से जॉइनिंग और रजिस्ट्रेशन फीस के तौर पर 30,000 से 35,000 लिए जाते थे। इसके बदले, उन्हें सिर्फ एक बेसिक किट देकर कंपनी के नेटवर्क में शामिल कर लिया जाता था।

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एक फर्जी कंपनी की आड़ में चल रहा नेटवर्क

जांच में पता चला कि आरोपी 'महादेव एंटरप्राइजेज' नाम की एक फर्जी कंपनी चला रहे थे। इसके अलावा, उनके पास एक MLM कंपनी की फ्रेंचाइजी भी थी। पूरा नेटवर्क भेलूपुर इलाके में एक आलीशान कॉर्पोरेट ऑफिस से चलाया जाता था। यहीं पर नए लोगों को ट्रेनिंग दी जाती थी और उन्हें नेटवर्क में दूसरों को शामिल करने के लिए तैयार किया जाता था।

ब्रेनवाशिंग के जरिए नेटवर्क का विस्तार

पुलिस के अनुसार, ट्रेनिंग सेशन के दौरान युवाओं को लग्ज़री कारें खरीदने, विदेश यात्रा करने और करोड़पति बनने के सपने दिखाए जाते थे। उन्हें अपने रिश्तेदारों और दोस्तों को इस स्कीम में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता था। हर सदस्य पर कम से कम तीन नए लोगों को जोड़ने का दबाव डाला जाता था; ऐसा न कर पाने पर उन्हें धमकी दी जाती थी कि उनकी सैलरी रोक दी जाएगी और जमा किए गए पैसे वापस नहीं किए जाएंगे।

चार राज्यों में फैला गिरोह

जांच से पता चला कि गिरोह ने शुरू में बिहार और झारखंड में अपना नेटवर्क बनाया था। इसके बाद, वाराणसी को नया बेस बनाकर उन्होंने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और पूर्वांचल क्षेत्र के कई ज़िलों में अपने कामकाज का विस्तार किया। पुलिस का दावा है कि पिछले सात महीनों में मास्टरमाइंड के बैंक अकाउंट्स के जरिए लगभग 4 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ है।

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मोबाइल फोन, लैपटॉप और दस्तावेज जब्त

छापेमारी के दौरान, पुलिस ने आरोपियों से 20 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, दो कारें, नकद और कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए। मोबाइल फोन पर धोखाधड़ी से जुड़ी चैट और ऑडियो रिकॉर्डिंग भी मिलीं। साइबर क्राइम पुलिस अभी बैंक खातों, डिजिटल रिकॉर्ड और WhatsApp चैट की जांच कर रही है। अधिकारियों ने युवाओं से अपील की है कि वे ऐसी स्कीमों से सावधान रहें जिनमें "जॉइनिंग फीस" मांगी जाती है या नौकरी के बदले भारी कमाई का वादा किया जाता है; उन्होंने सलाह दी है कि किसी कंपनी की पूरी जानकारी की जांच-पड़ताल करने के बाद ही उस पर भरोसा करें।

Location :  Varanasi

Published :  11 July 2026, 11:59 AM IST