
अयोध्या के श्रीराम मंदिर (Img: Pinterest)
Ayodhya: अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब केवल कानूनी जांच तक सीमित नहीं रह गया है। यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। एसआईटी की शुरुआती जांच रिपोर्ट के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। इसके बावजूद श्रद्धालुओं के मन में कई सवाल अब भी बने हुए हैं।
22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने श्रद्धा के साथ दान भी किया। लेकिन जून 2026 में एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया। रिपोर्ट में चढ़ावे की कथित चोरी के कई मामलों का उल्लेख किया गया। पुलिस ने जांच के दौरान चढ़ावा गिनने और बैंक तक पहुंचाने की प्रक्रिया से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार किया तथा नकदी भी बरामद की।
मामला सामने आने के बाद मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और चढ़ावे की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे। श्रद्धालुओं के बीच यह चर्चा तेज हो गई कि मंदिर में मिलने वाले दान की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाएंगे। हालांकि दर्शनार्थियों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है, लेकिन दान व्यवस्था को लेकर लोगों के मन में शंकाएं जरूर बढ़ी हैं।
चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद अब सभी की नजर एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर है। श्रद्धालुओं की अपेक्षा है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों की जिम्मेदारी तय की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाई जाए।
राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में ट्रस्ट के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल जांच पूरी कराना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं का भरोसा दोबारा मजबूत करना भी है। माना जा रहा है कि ट्रस्ट में पारदर्शिता बढ़ाने, दान व्यवस्था को और सुरक्षित बनाने तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए नए कदम उठाए जा सकते हैं। आने वाले दिनों में यही तय करेगा कि श्रद्धालुओं का विश्वास किस हद तक दोबारा स्थापित हो पाता है।
Location : Ayodhya
Published : 28 June 2026, 12:53 PM IST