पैसे दो, परीक्षा पास करो! नैनी ITI में ऐसे चल रहा था सॉल्वर गैंग का खेल, प्रिंसिपल समेत 11 गिरफ्तार

प्रयागराज के राजकीय आईटीआई नैनी में चल रही सीबीटी परीक्षा के दौरान ऐसा खेल सामने आया जिसने सभी को चौंका दिया। एसटीएफ की छापेमारी में प्रिंसिपल, परीक्षा प्रभारी, अनुदेशक और सॉल्वर एक साथ पकड़े गए। पूछताछ में पैसे लेकर परीक्षा पास कराने के तरीके का भी खुलासा हुआ।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 30 July 2026, 1:13 PM IST

Prayagraj: प्रयागराज के राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) नैनी में आयोजित अखिल भारतीय व्यावसायिक परीक्षा की कंप्यूटर आधारित (CBT) परीक्षा में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने कार्रवाई करते हुए ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह परीक्षार्थियों से पैसे लेकर उनकी जगह सॉल्वर बैठाकर परीक्षा पास कराने का काम कर रहा था। इस मामले में संस्थान के प्रिंसिपल, परीक्षा प्रभारी, कई अनुदेशकों और पांच सॉल्वरों समेत कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

मुखबिर की सूचना पर STF ने बिछाया जाल

एसटीएफ प्रयागराज को पिछले कई दिनों से लगातार सूचना मिल रही थी कि राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान नैनी में 11 जुलाई से 8 अगस्त तक चल रही अखिल भारतीय व्यावसायिक परीक्षा के दौरान बड़े स्तर पर गड़बड़ी हो रही है। आरोप था कि संस्थान के कुछ अधिकारी और कर्मचारी पैसे लेकर मूल अभ्यर्थियों की जगह दूसरे लोगों को परीक्षा दिलवा रहे हैं और सामूहिक नकल भी कराई जा रही है।

सूचना को गंभीरता से लेते हुए एसटीएफ की टीम ने पुलिस उपाधीक्षक शैलेश प्रताप सिंह के पर्यवेक्षण और निरीक्षक जय प्रकाश राय के नेतृत्व में लगातार निगरानी शुरू की। 29 जुलाई को मुखबिर ने सूचना दी कि तीसरी पाली की ऑनलाइन परीक्षा में भी सॉल्वर बैठाए गए हैं। इसके बाद स्थानीय पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए एसटीएफ ने संस्थान परिसर स्थित कौशल विकास भवन में छापा मार दिया।

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प्रिंसिपल से लेकर अनुदेशक और सॉल्वर तक गिरफ्तार

एसटीएफ ने मौके से पांच सॉल्वरों के साथ संस्थान के प्रिंसिपल अशोक कुमार, परीक्षा प्रभारी रवि प्रकाश और अनुदेशक फूल प्रकाश, धीरज कुमार शर्मा, राजेश कुमार तथा राजकुमार मौर्या को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार सॉल्वरों की पहचान शिवम कुमार, रणविजय सिंह, जय सिंह, जितेंद्र पटेल और दिलीप कुमार पटेल के रूप में हुई है। सभी पर आरोप है कि वे असली परीक्षार्थियों की जगह बैठकर ऑनलाइन परीक्षा दे रहे थे।

परीक्षा पास कराने के लिए तय था रेट

पूछताछ में सामने आया कि पढ़ाई में कमजोर अभ्यर्थियों से परीक्षा पास कराने के लिए प्रति परीक्षार्थी 4 हजार रुपये लिए जाते थे। यह रकम लेने के बाद उन्हें परीक्षा केंद्र पर अलग कमरे में बैठाए गए सॉल्वर के जरिए परीक्षा दिलाई जाती थी। जांच में यह भी सामने आया कि सॉल्वरों को परीक्षा देने के बदले 500-500 रुपये दिए जाते थे। उन्हें परीक्षार्थियों के प्रवेश पत्र की फोटो कॉपी देकर संबंधित रोल नंबर और जन्मतिथि के जरिए कंप्यूटर में लॉगिन कराया जाता था। परीक्षा पूरी होने के बाद वे लॉगआउट कर वहां से निकल जाते थे।

पूछताछ में हुए कई अहम खुलासे

पूछताछ में परीक्षा प्रभारी रवि प्रकाश ने बताया कि संस्थान में चल रही परीक्षा के दौरान पढ़ाई में कमजोर अभ्यर्थियों से पैसे लेकर उनकी जगह सॉल्वर बैठाए जाते थे। उसने बताया कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन धीरन्जन कुमार करता था, जो पहले नैनी आईटीआई में अनुदेशक रह चुका है और वर्तमान में राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान बांदा में तैनात है। रवि प्रकाश के मुताबिक धीरन्जन मोबाइल के जरिए संपर्क कर सॉल्वर भेजता था। फूल प्रकाश और राजकुमार मौर्या परीक्षार्थियों से पैसे इकट्ठा करते थे। परीक्षा खत्म होने के बाद रकम का बंटवारा संबंधित लोगों के बीच किया जाता था।

वहीं प्रिंसिपल अशोक कुमार ने पूछताछ में स्वीकार किया कि परीक्षा के संचालन के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी और परीक्षा प्रभारी तथा अन्य कर्मचारियों के माध्यम से परीक्षा कराई जा रही थी। पूछताछ में यह भी सामने आया कि धीरन्जन कुमार फोन के जरिए संस्थान के कर्मचारियों के संपर्क में रहता था और पूरी व्यवस्था संचालित करता था। अनुदेशक फूल प्रकाश और धीरज कुमार शर्मा ने भी पूछताछ में बताया कि वे धीरन्जन कुमार के संपर्क में रहते थे। धीरज सीटिंग प्लान और डाटा फीडिंग का काम देखता था, जबकि अन्य कर्मचारी परीक्षा के दौरान पूरी व्यवस्था संभालते थे। परीक्षा समाप्त होने के बाद सभी के बीच रकम का बंटवारा किया जाता था।

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छापेमारी में भारी मात्रा में सामान और नकदी बरामद

एसटीएफ की कार्रवाई के दौरान मौके से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और उपकरण भी बरामद किए गए। इनमें पांच प्रवेश पत्रों की फोटो कॉपी, पांच मॉनिटर, पांच सीपीयू, पांच कीबोर्ड, पांच माउस, परीक्षा से जुड़े 67 दस्तावेज, छह एंड्रॉयड मोबाइल फोन, तीन आधार कार्ड, तीन पैन कार्ड, सात एटीएम कार्ड और एक पेन ड्राइव शामिल हैं।

इसके अलावा परीक्षार्थियों से परीक्षा पास कराने के नाम पर वसूले गए 5 लाख 10 हजार रुपये नकद और तलाशी के दौरान 16,370 रुपये भी बरामद किए गए।

मुख्य आरोपी की तलाश जारी

पूछताछ में कई बार धीरन्जन कुमार का नाम सामने आने के बाद एसटीएफ ने उसे इस पूरे नेटवर्क का अहम सदस्य माना है। फिलहाल उसकी गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। फिलहाल, गिरफ्तार सभी आरोपियों के खिलाफ थाना नैनी, कमिश्नरेट प्रयागराज में मुकदमा संख्या 362/2026 दर्ज किया गया है। उन पर भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 318(2) तथा उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम-2024 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

Location :  Prayagraj

Published :  30 July 2026, 1:13 PM IST