
चार दिन थाने में बिठाने के बाद दिखाई गिरफ्तारी (Img: AI Generated Image)
Prayagraj: मेजा में एक बांग्लादेशी डॉक्टर की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में आ गई है। आरोप है कि डॉक्टर को पुलिस ने 15 अगस्त को उसके क्लीनिक से पकड़ लिया था, लेकिन रिकॉर्ड में उसकी गिरफ्तारी 19 अगस्त को दिखाई गई। मामले की जांच के दौरान सामने आए सीसीटीवी फुटेज के बाद पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठे। इसके बाद मेजा थाना प्रभारी जितेंद्र शुक्ला और अतिरिक्त प्रभारी कमलेश यादव को निलंबित कर दिया गया।
जानकारी के मुताबिक, डॉ. कमलेश विश्वास उर्फ सुजल मेजा के सोनार का तारा (ऊंचडीह) इलाके में लंबे समय से क्लीनिक चला रहा था। बताया गया कि वह करीब 20 वर्षों से इलाके में रह रहा था और वहां मरीजों का इलाज करता था।
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जांच के दौरान पुलिस को उसके बांग्लादेशी नागरिक होने की जानकारी मिली। उसके पास से अलग-अलग नामों से बने दो आधार कार्ड मिलने की बात भी सामने आई है। इसके अलावा मार्कशीट और ट्रांसफर सर्टिफिकेट के आधार पर बनवाया गया भारतीय पासपोर्ट भी बरामद होने की जानकारी है। पुलिस के मुताबिक, उसके पास भारत में रहने के लिए वैध वीजा नहीं था।
मामले में सबसे बड़ा सवाल डॉक्टर की गिरफ्तारी की तारीख को लेकर उठ रहा है। आरोप है कि 15 अगस्त को पुलिस उसे क्लीनिक से लेकर थाने पहुंची थी, जबकि आधिकारिक तौर पर गिरफ्तारी 19 अगस्त को दिखाई गई। इसके बाद डॉक्टर को अदालत के सामने पेश किया गया और न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल भेज दिया गया। बाद में सामने आए सीसीटीवी फुटेज को लेकर पीड़ित पक्ष ने न्यायालय का रुख किया। इसी के बाद मामले ने तूल पकड़ा और पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच शुरू हुई।
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मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस आयुक्त के आदेश पर कार्रवाई की गई। डीसीपी यमुनापार विवेक चंद्र यादव ने मेजा थाना प्रभारी जितेंद्र शुक्ला और अतिरिक्त प्रभारी कमलेश यादव के निलंबन की पुष्टि की है। अब इस मामले में जांच के दौरान सामने आने वाले अन्य तथ्यों पर नजर बनी हुई है।
Location : Prayagraj
Published : 18 September 2026, 2:20 PM IST