
नवजात की मौत पर विवाद (IMG: Dynamite News)
Maharajganj: सरकारी अस्पताल में प्रसव के बाद एक नवजात की हालत बिगड़ी, उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन समय पर एंबुलेंस नहीं मिली। परिजन निजी वाहन की व्यवस्था कर बच्चे को अस्पताल लेकर निकले, मगर रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद परिवार में कोहराम मचा है। मामला नौतनवा क्षेत्र के अड्डा बाजार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) का है। नवजात के पिता ने अस्पताल प्रबंधन पर बच्चे की गंभीर हालत की जानकारी समय से नहीं देने और 102/108 एंबुलेंस सेवा में देरी का आरोप लगाया है।
वहीं, अस्पताल कर्मचारियों का कहना है कि बच्चा ओवरडेट था और गर्भ में ही उसने मल त्याग कर दिया था, जिसके कारण जन्म के बाद उसकी हालत बिगड़ गई। दूसरी तरफ, परिजन अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में दर्ज प्रसव की संभावित तारीख का हवाला देकर इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नवजात को समय रहते बेहतर इलाज क्यों नहीं मिल सका? क्या यह महज चिकित्सकीय जटिलता थी या रेफरल और एंबुलेंस व्यवस्था में हुई देरी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया?
मिली जानकारी के मुताबिक, नौतनवा क्षेत्र के कजरी गांव निवासी संतोष चौरसिया मंगलवार शाम करीब 4:30 बजे अपनी गर्भवती पत्नी अनुराधा को लेकर अड्डा बाजार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे थे। यहां अस्पताल में मौजूद स्टाफ नर्स शीला सिंह ने शाम करीब 5 बजे महिला का प्रसव कराया। प्रसव के बाद अनुराधा ने एक नवजात को जन्म दिया। परिजनों के मुताबिक, बच्चे के जन्म के कुछ ही समय बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी।
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नवजात के पिता संतोष चौरसिया ने अस्पताल और एंबुलेंस सेवा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि बच्चे की हालत बिगड़ने की जानकारी उन्हें समय रहते नहीं दी गई। जब नवजात को जिला अस्पताल रेफर किया गया तो उन्होंने 102/108 एंबुलेंस सेवा के लिए फोन किया, लेकिन तत्काल एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी। संतोष का कहना है कि परिवार काफी देर तक एंबुलेंस का इंतजार करता रहा। जब कोई तत्काल व्यवस्था नहीं हो पाई तो मजबूरी में निजी वाहन का इंतजाम करना पड़ा। इसके बाद नवजात को लेकर परिजन महराजगंज जिला अस्पताल के लिए रवाना हुए।
इस घटना के बाद अस्पताल कर्मचारियों और परिजनों के दावों में अंतर सामने आया है। अस्पताल स्टाफ की ओर से बताया गया कि नवजात ओवरडेट था। कर्मचारियों के मुताबिक, बच्चे ने गर्भ में ही मल त्याग कर दिया था, जिसके कारण जन्म के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। वहीं, परिजन इस दावे से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में प्रसव की संभावित तारीख यानी EDD 21 नवंबर 2026 दर्ज थी। ऐसे में उनका सवाल है कि जब रिपोर्ट में प्रसव की संभावित तारीख आगे की थी तो बच्चे को ओवरडेट कैसे बताया जा रहा है?
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मामले को लेकर CHC अधीक्षक अरुण गुप्ता ने बताया कि उन्होंने अड्डा बाजार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्टाफ नर्स से घटना के संबंध में जानकारी ली है। उनके अनुसार, नवजात ओवरडेट था और मल से सना हुआ था। इसी वजह से जन्म के बाद उसकी हालत बिगड़ने की बात सामने आई है। अधीक्षक ने यह भी बताया कि अभी तक इस मामले में किसी भी परिजन की ओर से लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। ऐसे में अस्पताल प्रबंधन की ओर से फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर ही घटना के बारे में बताया गया है।
अड्डा बाजार PHC में हुई इस घटना ने सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव के बाद नवजात की आपातकालीन देखभाल और रेफरल व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रसव के बाद यदि किसी बच्चे की हालत गंभीर होती है तो उसे समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना बेहद जरूरी होता है। ऐसे में अस्पताल की ओर से रेफरल की प्रक्रिया, एंबुलेंस की उपलब्धता और नवजात को सुरक्षित तरीके से दूसरे अस्पताल तक पहुंचाने की व्यवस्था की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। इस मामले में परिजनों का आरोप है कि उन्हें समय पर बच्चे की गंभीर हालत की जानकारी नहीं दी गई और एंबुलेंस मिलने में देरी हुई। दूसरी ओर, अस्पताल स्टाफ नवजात की स्थिति को चिकित्सकीय जटिलता से जोड़ रहा है।
Location : Maharajganj
Published : 3 November 2026, 2:11 PM IST
Topics : Ambulance Service Delay Government Hospital Negligence Maharajganj News (महाराजगंज न्यूज़) newborn death case Uttar Pradesh Health Department