‘लोग क्या कहेंगे’ का खौफ: झूठी इज्जत के आगे हारी बाप की ममता, फोन पर बात करने से नाराज पिता ने किए बेटी के 6 टुकड़े

लखनऊ ट्रेन में मिले किशोरी के क्षत-विक्षत शव के मामले में जीआरपी ने कुशीनगर के पिता बिग्गन अंसारी को गिरफ्तार किया है। दो बड़ी बेटियों के घर छोड़ने के बाद बदनामी के डर से, उसने अपनी 15 वर्षीय तीसरी बेटी द्वारा दूसरे समुदाय के युवक से बात करने पर उसकी हत्या कर शव के टुकड़े ट्रेन में छिपा दिए थे।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 21 May 2026, 11:52 AM IST

Kushinagar:  कुशीनगर की बेटी की मौत ने ऐसे खौफनाक आईने से पर्दा हटाया है, जिसकी कल्पना शायद आप कभी नहीं कर सकते। एक ऐसी वारदात, जो पवित्र कहे जाने वाले 'पिता' के रिश्ते पर ही गहरे सवाल खड़े कर दे। यह कहानी सिर्फ एक हत्या की नहीं है, बल्कि उस खोखली सामाजिक सोच की है जहां 'लोग क्या कहेंगे' का डर, एक बाप की ममता और उसकी इंसानियत पर भारी पड़ गया।

लखनऊ के गोमती नगर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के कोच में मिले युवती के शव के 6 टुकड़ों की मिस्ट्री जब खुली, तो सच ने सबको झकझोर दिया। हत्यारा कोई बाहरी दुश्मन नहीं, बल्कि लड़की का पिता बिग्गन अंसारी निकला।

समाज के तानों का डर और एक पिता की 'मजबूरी'

आखिर वो क्या मजबूरी रही होगी जिसने एक पिता को कसाई बनने पर मजबूर कर दिया? पुलिस पूछताछ में जो बात सामने आई, वो हमारे समाज की सबसे बड़ी बीमारी को दर्शाती है। आरोपी पिता ने बताया कि उसकी दो बड़ी बेटियां पहले ही घर छोड़कर जा चुकी थीं। इसके बाद समाज, आस-पड़ोस और रिश्तेदारों ने उसे तानों से मारना शुरू कर दिया था।

वह जहां भी जाता, लोग उस पर उंगलियां उठाते। समाज के इन तीखे तानों ने उसके दिमाग में इस कदर डर और हीनभावना भर दी कि वह डिप्रेशन और गुस्से के खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया। जब उसने देखा कि उसकी 15 वर्षीय तीसरी बेटी शब्बा भी दूसरे समुदाय के एक लड़के से फोन पर बात कर रही है, तो वह भीतर तक कांप गया। उसे लगा कि अगर यह बेटी भी चली गई, तो समाज उसे जीने नहीं देगा।

बेटी के मोह पर भारी पड़ी 'झूठी इज्जत'

कहा जाता है कि बेटियों के लिए उनका पिता सबसे सुरक्षित साया होता है, लेकिन यहाँ समाज के तानों का खौफ इतना भयावह था कि उस पिता को अपनी ही मासूम बेटी का चेहरा देखकर जरा भी मोह नहीं आया। अपनी तथाकथित 'इज्जत' को बचाने के लिए उसने बेटी के जीवन को ही खत्म करना बेहतर समझा।

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साजिश के तहत उसने परिवार को बाहर भेजा और अपनी बहन-बहनोई के साथ मिलकर शब्बा को मौत के घाट उतार दिया। पहचान छिपाने के लिए उसने बेटी के शरीर के 6 टुकड़े किए, सिर को तालाब में फेंका और धड़ को छपरा-गोमती नगर एक्सप्रेस में लावारिस छोड़ दिया।

क्या यही है हमारे समाज का असली आईना?

यह खौफनाक वारदात हमारे सामूहिक सामाजिक ढांचे पर एक करारा तमाचा है। यह घटना चीख-चीख कर पूछती है कि क्या हम एक ऐसे समाज में रह रहे हैं जहां किसी की जान से ज्यादा कीमती 'लोग क्या कहेंगे' की परवाह है?

जब एक पिता अपनी ही औलाद के खून का प्यासा हो जाए, तो दोष सिर्फ उस उंगली दबाने वाले हाथ का नहीं, बल्कि उस बंदूक को लोड करने वाले समाज का भी होता है। समाज के ताने और तिरस्कार की दीवारें इतनी ऊंची हो चुकी हैं कि उनके आगे खून के रिश्ते भी दम तोड़ रहे हैं।

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इस तरह की घटनाओं का दोषी कौन?

कानून बिग्गन अंसारी को उसके इस जघन्य अपराध की सजा जरूर देगा, लेकिन उन सामाजिक ठेकेदारों का क्या जो हर घर की खिड़की में झांक कर तानों के तीर तैयार रखते हैं? क्या इस ऑनर किलिंग का असली जिम्मेदार सिर्फ वो पिता है, या वो समाज भी है जिसने अपनी रूढ़िवादिता से उसे इस हद तक लाचार और हिंसक बना दिया? आखिर कब तक 'झूठी शान' की वेदी पर मासूम बेटियों की बलि चढ़ती रहेगी? और सबसे बड़ा सवाल क्या हम वाकई एक सभ्य समाज की ओर बढ़ रहे हैं, या हम अंदर से पूरी तरह खोखले हो चुके हैं?

Location :  Kushinagar

Published :  21 May 2026, 11:52 AM IST