
कौशाम्बी में अधिवक्ताओं का बड़ा ऐलान (IMG: Dynamite News)
Kaushambi: उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले की मंझनपुर तहसील में प्रशासनिक और न्यायिक कामकाज को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। अदालतों में मुकदमों की सुनवाई, आदेश पारित करने में देरी और वादकारियों की शिकायतों के निस्तारण को लेकर अधिवक्ताओं ने अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अधिवक्ता वेलफेयर एसोसिएशन तहसील मंझनपुर ने उपजिलाधिकारी (SDM) मंझनपुर और नायब तहसीलदार मंझनपुर/करारी की अदालतों के बहिष्कार का ऐलान किया है। एसोसिएशन की आवश्यक बैठक में 10 सूत्रीय समस्याओं पर चर्चा के बाद सर्वसम्मति से यह फैसला लिया गया।
अधिवक्ता वेलफेयर एसोसिएशन तहसील मंझनपुर की आवश्यक बैठक में अधिवक्ताओं ने तहसील की प्रशासनिक और न्यायिक कार्यप्रणाली से जुड़ी 10 सूत्रीय समस्याओं को सामने रखा। बैठक में अलग-अलग मामलों की सुनवाई, प्रार्थना पत्रों को दर्ज करने की प्रक्रिया और शिकायतों के निस्तारण को लेकर चर्चा हुई। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि उनकी ओर से उठाई जा रही समस्याओं पर उचित ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
बैठक में राजस्व की धारा 76 और 80 से जुड़े मामलों को लेकर भी नाराजगी जाहिर की गई। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि इन मामलों में मनमाने तरीके से काम किया जा रहा है। उनका कहना है कि मुकदमों की पत्रावलियों के दायरे में देरी की जाती है, जिससे मामलों की सुनवाई और आगे की प्रक्रिया प्रभावित होती है। इसके साथ ही बहस पूरी होने के बाद भी लंबे समय तक आदेश पारित नहीं किए जाने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। अधिवक्ताओं के मुताबिक, कई मामलों में बहस होने के बाद महीनों तक आदेश नहीं आते। इससे मुकदमों से जुड़े वादकारियों को इंतजार करना पड़ता है और उनके मामलों का निस्तारण समय पर नहीं हो पाता।
कौशाम्बी में अधिवक्ताओं का बड़ा ऐलान (IMG: Dynamite News)
बैठक में नायब तहसीलदार मंझनपुर/करारी अतुल वर्मा के व्यवहार और कार्यप्रणाली को लेकर भी अधिवक्ताओं ने असंतोष जाहिर किया। अधिवक्ताओं ने उनके कामकाज के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुकदमों का निस्तारण केवल तकनीकी आधार पर नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि किसी भी मामले में उपलब्ध तथ्यों और उसके गुण-दोष को ध्यान में रखकर निर्णय किया जाना चाहिए। अधिवक्ताओं के मुताबिक, न्यायिक प्रक्रिया का उद्देश्य मामलों का नियमानुसार और उचित तरीके से निस्तारण करना है। ऐसे में केवल तकनीकी आधार पर मुकदमों का निपटारा किए जाने से वादकारियों को परेशानी हो सकती है। बैठक में इस मुद्दे पर भी चर्चा हुई और संबंधित अधिकारी की कार्यप्रणाली में सुधार की मांग उठाई गई।
बैठक में सभी मुद्दों पर चर्चा के बाद अधिवक्ता वेलफेयर एसोसिएशन ने सर्वसम्मति से फैसला लिया कि जब तक 10 सूत्रीय समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक अधिवक्ता SDM मंझनपुर और नायब तहसीलदार मंझनपुर/करारी की अदालतों में न्यायिक कार्यों से विरत रहेंगे। यानी अधिवक्ता इन दोनों अधिकारियों की अदालतों में मुकदमों से जुड़े न्यायिक कार्यों में हिस्सा नहीं लेंगे।
मंझनपुर तहसील में अधिवक्ताओं के इस फैसले के बाद अब प्रशासन की भूमिका अहम हो गई है। एक तरफ अधिवक्ता 10 सूत्रीय समस्याओं के समाधान की मांग पर अड़े हैं, वहीं दूसरी तरफ संबंधित अदालतों के बहिष्कार से तहसील के न्यायिक कामकाज पर असर पड़ने की आशंका है।
Location : Kaushambi
Published : 4 November 2026, 3:05 PM IST