कानपुर किडनी कांड में डॉक्टर दंपती को बड़ा झटका, कोर्ट ने खारिज की जमानत अर्जी

कानपुर किडनी कांड में जिला अदालत ने मुख्य आरोपी डॉ. सुरजीत आहूजा, डॉ. प्रीति आहूजा और एंबुलेंस चालक शिवम अग्रवाल की जमानत अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने मामले को संगठित और गंभीर अपराध माना। अभियोजन पक्ष ने आरोपियों की किडनी ट्रांसप्लांट गिरोह में सक्रिय भूमिका बताई।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 22 May 2026, 2:27 PM IST

Kanpur: कानपुर के चर्चित किडनी कांड मामले में मुख्य आरोपी आहूजा हॉस्पिटल के मालिक डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा, उनकी पत्नी डॉ. प्रीति आहूजा और एंबुलेंस चालक शिवम अग्रवाल को अदालत से बड़ा झटका लगा है। जिला जज अनमोल पाल की अदालत ने तीनों की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। कोर्ट ने मामले को गंभीर और संगठित अपराध मानते हुए राहत देने से इनकार कर दिया।

बचाव पक्ष ने खुद को बताया निर्दोष

जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि आरोपियों को झूठा फंसाया गया है। उनका कहना था कि कथित किडनी ट्रांसप्लांट में डॉक्टर दंपती की कोई भूमिका नहीं थी। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य मौजूद नहीं हैं।

अभियोजन पक्ष ने बताया संगठित गिरोह

वहीं, जिला शासकीय अधिवक्ता (डीजीसी) दिलीप अवस्थी ने अदालत में जोरदार तरीके से पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला एक संगठित गिरोह द्वारा चलाया जा रहा था, जिसमें हर आरोपी की अलग-अलग जिम्मेदारी थी। कोई किडनी दाता की तलाश करता था तो कोई जरूरतमंद मरीजों को खोजता था। कुछ लोग फर्जी दस्तावेज तैयार करते थे, जबकि ऑपरेशन और अन्य मेडिकल प्रक्रिया में भी सहयोग किया जाता था।

कानपुर में साइबर ठगी का बड़ा खुलासा, खेतों से चल रहा था ‘जामताड़ा स्टाइल’ नेटवर्क, 8 गिरफ्तार

ऑपरेशन के बाद मरीजों को भेजा जाता था दूसरे अस्पताल

अभियोजन पक्ष के अनुसार, ट्रांसप्लांट के बाद मरीजों को अलग-अलग अस्पतालों में भेज दिया जाता था ताकि पूरे नेटवर्क पर शक न हो। अदालत को बताया गया कि यह पूरी प्रक्रिया योजनाबद्ध तरीके से की जा रही थी और डॉक्टर दंपती इसमें सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।

चालक शिवम को भी नहीं मिली राहत

मामले में आरोपी एंबुलेंस चालक शिवम अग्रवाल ने भी अदालत में खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि उसे झूठा फंसाया गया है। हालांकि कोर्ट ने उसकी दलीलों को भी स्वीकार नहीं किया और जमानत देने से इनकार कर दिया।

4 घंटे की बिजली में कैसे बनेंगे डॉक्टर? आधी रात मेडिकल कॉलेज के छात्रों का फूटा गुस्सा, गेट पर धरना

कोर्ट ने माना गंभीर अपराध

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जिला जज अनमोल पाल ने मामले को गंभीर अपराध मानते हुए तीनों आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब मामले की आगे की सुनवाई और जांच पर सभी की नजरें टिकी हैं।

Location :  Kanpur

Published :  22 May 2026, 2:27 PM IST