ग्रेटर नोएडा के जिम्स अस्पताल में हड़ताल का कितना असर? अब तक 300 ऑपरेशन टले, 10 हजार से ज्यादा मरीज वापस लौटे

ग्रेटर नोएडा के जिम्स अस्पताल में आउटसोर्स कर्मचारियों की 10 दिन की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रहीं। 10 हजार से ज्यादा मरीज वापस लौटे और करीब 300 ऑपरेशन टालने पड़े। अब अस्पताल प्रशासन सेवाओं को सामान्य करने में जुटा है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 26 June 2026, 12:51 PM IST

Greater Noida: ग्रेटर नोएडा स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में आउटसोर्स कर्मचारियों की 10 दिन तक चली हड़ताल ने स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित कर दी। इस दौरान इलाज के लिए पहुंचे 10 हजार से अधिक मरीजों को बिना उपचार के वापस लौटना पड़ा। मजबूरी में कई मरीजों ने नोएडा जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों का रुख किया। वहीं करीब 300 निर्धारित सर्जरी भी टालनी पड़ी, जिससे मरीजों की परेशानी और खर्च दोनों बढ़ गए।

ओपीडी में मरीजों की संख्या में आई भारी गिरावट

हड़ताल से पहले जिम्स की जनरल मेडिसिन, नेत्र रोग, आर्थोपेडिक, चेस्ट, स्किन और इमरजेंसी समेत विभिन्न विभागों की ओपीडी में प्रतिदिन 1400 से 1900 मरीज इलाज के लिए पहुंचते थे। लेकिन हड़ताल शुरू होते ही यह संख्या घटकर महज 200 तक पहुंच गई। हालांकि एक दिन अधिकतम 1100 मरीज ओपीडी पहुंचे। जहां नर्सिंग छात्रों और बाहर से बुलाई गई नर्सों की मदद से सीमित सेवाएं संचालित की गईं।

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पंजीकरण ठप होने से लौटे मरीज

हड़ताल के दौरान कर्मचारियों ने अस्पताल परिसर में धरना जारी रखा, जिससे मरीजों के बैठने वाले स्थान और पंजीकरण व्यवस्था पर सीधा असर पड़ा। रजिस्ट्रेशन का काम लगभग पूरी तरह ठप हो गया। इसका परिणाम यह हुआ कि ग्रेटर नोएडा ही नहीं, बल्कि नोएडा, बुलंदशहर, खुर्जा, अलीगढ़ और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले हजारों मरीज बिना इलाज के वापस लौटने को मजबूर हो गए। कई मरीजों को निजी अस्पतालों में इलाज कराना पड़ा, जहां उन्हें अधिक खर्च उठाना पड़ा।

सिर्फ इमरजेंसी सेवाएं रहीं चालू

हड़ताल के दौरान अस्पताल में केवल इमरजेंसी सेवाएं किसी तरह संचालित होती रहीं। पुराने भर्ती मरीजों और गंभीर मामलों को ही प्राथमिकता के आधार पर उपचार दिया गया। रोजाना करीब एक हजार मरीज ऐसे रहे, जिन्हें इलाज नहीं मिल सका और उन्हें दूसरे सरकारी या निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ा। जिन मरीजों की सर्जरी पहले से तय थी, उन्हें नई तारीख देकर बाद में आने के लिए कहा गया। कुछ मरीजों ने इंतजार करने के बजाय निजी अस्पतालों में ऑपरेशन कराना उचित समझा।

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सेवाएं पटरी पर लाने की तैयारी

जिम्स के निदेशक डॉ. ब्रिगेडियर राकेश गुप्ता ने बताया कि अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को जल्द पूरी तरह सामान्य बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए शासन को पत्र भेजकर आसपास के सरकारी अस्पतालों से 100 स्टाफ नर्स उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। उनका कहना है कि अतिरिक्त स्टाफ मिलने के बाद ओपीडी और आईपीडी सेवाओं को पहले की तरह सुचारू रूप से संचालित किया जा सकेगा। फिलहाल अस्पताल में ओपीडी के साथ आईपीडी सेवाएं भी धीरे-धीरे शुरू कर दी गई हैं।

Location :  Greater Noida

Published :  26 June 2026, 12:51 PM IST