
मोबाइल में आपत्तिजनक चीजें देखता था छात्र (Img: AI Generated Image)
Gorakhpur: ऑनलाइन पढ़ाई के लिए हाथ में आया मोबाइल फोन एक चौथी कक्षा के बच्चे के व्यवहार में बड़ा बदलाव लेकर आया। मामला तब गंभीर हो गया, जब परिवार को बच्चे की फोन इस्तेमाल करने की आदत और उसके व्यवहार में कुछ ऐसी बातें नजर आईं, जिनसे वे परेशान हो गए। इसके बाद बच्चे को विशेषज्ञ के पास ले जाया गया और उसकी काउंसिलिंग शुरू कराई गई।
बताया जा रहा है कि सिविल लाइंस इलाके के एक प्रतिष्ठित स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे को ऑनलाइन कक्षाओं के लिए मोबाइल फोन दिया गया था। पढ़ाई के अलावा वह फोन पर गेम खेलने लगा। धीरे-धीरे फोन के प्रति उसकी दिलचस्पी इतनी बढ़ गई कि कुछ समय बाद मोबाइल न मिलने पर वह रोने और चिड़चिड़ाने लगा।
परिवार के अनुसार, बच्चा मोबाइल को लेकर लगातार जिद करने लगा और कई बार फोन लेकर बाथरूम में काफी देर तक रहने लगा। जब परिजनों को उसकी गतिविधियों पर शक हुआ तो उन्होंने मोबाइल की जांच की। इसमें अश्लील वेबसाइट और आपत्तिजनक सामग्री देखे जाने की जानकारी सामने आई।
परिवार ने बच्चे को समझाने की कोशिश की, लेकिन उसके व्यवहार में अपेक्षित सुधार नहीं आया। करीब दो महीने पहले स्कूल की ओर से भी परिजनों को बुलाया गया। वहां बच्चे के व्यवहार को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आईं।
स्कूल प्रबंधन के मुताबिक, बच्चे ने शिक्षिका की आपत्तिजनक तस्वीर और कुछ अशोभनीय चित्र बनाए थे। सहपाठियों की ओर से भी उसके अनुचित व्यवहार को लेकर शिकायत की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्कूल ने बच्चे का नाम काट दिया और परिवार को विशेषज्ञ से सलाह लेने के लिए कहा। इसके बाद परिजन बच्चे को मनोवैज्ञानिक चिकित्सक के पास लेकर पहुंचे। फिलहाल उसकी नियमित काउंसिलिंग और उपचार चल रहा है।
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि कम उम्र में बच्चों की अश्लील सामग्री तक पहुंच और बिना निगरानी लंबे समय तक स्क्रीन इस्तेमाल उनके व्यवहार पर असर डाल सकता है। हालांकि, किसी बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर कोई निष्कर्ष केवल शुरुआती घटनाओं के आधार पर नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए विशेषज्ञ द्वारा विस्तृत मूल्यांकन जरूरी होता है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि माता-पिता बच्चों को मोबाइल देते समय उनकी ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें। साथ ही फोन के इस्तेमाल का समय तय किया जाए और बच्चे के व्यवहार में अचानक बदलाव दिखाई देने पर उसे डांटने के बजाय विशेषज्ञ से सलाह ली जाए।
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इसी बीच शहर में 21 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्र से जुड़ा एक अलग मानसिक स्वास्थ्य संबंधी मामला भी सामने आया है। परिजनों के अनुसार, छात्र अक्सर चुप रहता है, अचानक गुस्सा करता है और अपने लिंग को लेकर असहजता व्यक्त करता है। वह परिवार से खुद को लड़की के रूप में बदलने की बात भी कहता है। मनोवैज्ञानिक की निगरानी में उसकी नियमित काउंसिलिंग चल रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में परिवार का सहयोग और बिना किसी भेदभाव के विशेषज्ञ की मदद लेना बेहद जरूरी है। बच्चों और युवाओं के व्यवहार में असामान्य बदलाव को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते बातचीत और उचित परामर्श का रास्ता अपनाना चाहिए।
Location : Gorakhpur
Published : 15 September 2026, 10:15 AM IST