देवरिया के गौरी बाजार थाना क्षेत्र में रामनवमी की खरीदारी करने जा रही 45 वर्षीय महिला की टैंकर की चपेट में आने से मौत हो गई। गंभीर हालत में पहले सीएचसी और फिर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। हादसे के बाद परिवार में कोहराम मच गया और गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

मृतक रीता देवी (देवरिया)
Deoria: उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के गौरी बाजार थाना क्षेत्र में सोमवार दोपहर एक दर्दनाक सड़क हादसे ने खुशियों का माहौल मातम में बदल दिया। खैरा बनुवा गांव की रहने वाली 45 वर्षीय रीता देवी, पत्नी रणजीत प्रसाद, अपने पुत्र के साथ बाइक पर सवार होकर रामनवमी का बाजार करने निकली थीं। परिवार में त्योहार की तैयारी चल रही थी और इसी सिलसिले में मां-बेटे दोपहर के समय बाजार की ओर जा रहे थे।
बताया जा रहा है कि जब वे रामपुर चौराहे के पास रुद्रपुर मार्ग पर करण मोबाइल के सामने पहुंचीं, तभी एक तेज रफ्तार टैंकर की चपेट में आ गईं। हादसा इतना भीषण था कि रीता देवी गंभीर रूप से घायल हो गईं। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत मानवता दिखाते हुए उन्हें इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। मौके पर अफरातफरी मच गई और वहां मौजूद लोगों की भीड़ जुट गई।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने रीता देवी की हालत गंभीर देखते हुए उन्हें महर्षि देवराहा बाबा मेडिकल कॉलेज, देवरिया रेफर कर दिया। परिजन भी घबराहट और उम्मीद के बीच उन्हें लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। इलाज के दौरान चिकित्सकों ने रीता देवी को मृत घोषित कर दिया।
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जैसे ही महिला की मौत की खबर परिवार तक पहुंची, घर में कोहराम मच गया। त्योहार की तैयारी में जुटा परिवार अचानक गहरे सदमे में डूब गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बताया गया कि रीता देवी अपने पीछे पुत्री सरस्वती और पुत्र हितेश को छोड़ गई हैं। जिस बेटे के साथ वह बाजार करने निकली थीं, उसी की आंखों के सामने यह हादसा हो गया, जिसने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया।
रीता देवी की मौत की खबर गांव खैरा बनुवा पहुंचते ही शोक की लहर दौड़ गई, गांव के लोग इस घटना से स्तब्ध हैं। त्योहार के मौके पर हुए इस दर्दनाक हादसे ने हर किसी को भावुक कर दिया। गांव में मातम पसरा है और लोगों की आंखें नम हैं। जो महिला कुछ देर पहले घर से बाजार जाने के लिए निकली थी, उसकी मौत की खबर ने पूरे गांव को हिला दिया।
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परिजनों का कहना है कि रीता देवी रामनवमी से जुड़ी खरीदारी करने के लिए अपने बेटे हितेश के साथ गई थीं। किसी ने नहीं सोचा था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा। स्थानीय लोगों का मानना है कि सड़क पर भारी वाहनों की तेज रफ्तार आए दिन हादसों की वजह बन रही है। इस घटना के बाद इलाके में शोक के साथ-साथ आक्रोश भी देखा जा रहा है।
फिलहाल, पुलिस की ओर से मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है। वहीं, इस हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और लापरवाह ड्राइविंग पर सवाल खड़े कर दिए हैं। त्योहार की खुशियां एक पल में मातम में बदल गईं और रीता देवी का परिवार अपूरणीय क्षति के दर्द से गुजर रहा है।