Budaun News: 10 दिन पहले बनी इंटरलॉकिंग ईंटें उखाड़ीं, VIP मार्ग पर विवाद; जांच की मांग

बदायूं में कलेक्ट्रेट से लालपुल जाने वाले VIP मार्ग पर जिला पंचायत अध्यक्ष के आवास के सामने सरकारी फुटपाथ की इंटरलॉकिंग ईंटें उखाड़ने का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, करीब 10 दिन पहले ही निर्माण कराया गया था। सत्ताधारी नेताओं की शिकायत के बाद मामले की जांच की मांग उठ रही है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 21 October 2026, 2:29 PM IST

Budaun: उत्तर प्रदेश के बदायूं शहर में सरकारी फुटपाथ की इंटरलॉकिंग ईंटें उखाड़कर ले जाने का मामला सामने आने के बाद हंगामा मच गया है। कलेक्ट्रेट से लालपुल जाने वाले शहर के प्रमुख वीआईपी मार्ग पर जिला पंचायत अध्यक्ष के आवास के सामने हुई इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि इस फुटपाथ पर करीब 8 से 10 दिन पहले ही सरकारी धन से इंटरलॉकिंग का काम कराया गया था। अब सत्ताधारी दल के नेताओं की शिकायत के बाद मामला गरमा गया है।

रात में JCB और ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर पहुंचे लोग

स्थानीय लोगों के मुताबिक, बीती रात एक व्यक्ति जेसीबी मशीन और ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर मौके पर पहुंचा। इसके बाद फुटपाथ पर लगी सीमेंट की इंटरलॉकिंग ईंटों को उखाड़ने का काम शुरू किया गया। ईंटों को ट्रॉली में भरकर ले जाने की तैयारी की जा रही थी।

हालांकि, हाल ही में बने फुटपाथ को उखाड़ते देख आसपास के लोग मौके पर जुट गए और विरोध जताने लगे। इसके बाद मामला चर्चा में आ गया। स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि जब कुछ दिन पहले ही सरकारी धन से निर्माण कराया गया था, तो उसे इतनी जल्दी हटाने की जरूरत क्यों पड़ी?

VIP मार्ग पर निर्माण कार्य को लेकर उठे सवाल

कलेक्ट्रेट से लालपुल की ओर जाने वाला यह मार्ग बदायूं शहर के प्रमुख रास्तों में गिना जाता है। इसी मार्ग पर सदर विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष और पूर्व विधायक धर्मेंद्र शाक्य सहित कई जनप्रतिनिधियों के आवास बताए जाते हैं।

ऐसे महत्वपूर्ण मार्ग पर हाल ही में हुए निर्माण कार्य को उखाड़े जाने की घटना ने सरकारी कामकाज और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि निर्माण कार्य पर सरकारी धन खर्च हुआ था, तो उसे हटाने के पीछे क्या वजह थी, यह जांच का विषय है।

किसके आदेश पर उखाड़ी गईं सरकारी ईंटें?

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि फुटपाथ की इंटरलॉकिंग ईंटें हटाने का आदेश किसने दिया? क्या संबंधित विभाग से इसके लिए अनुमति ली गई थी? यदि अनुमति दी गई थी, तो इसकी वजह क्या थी?

फिलहाल, इन सवालों के जवाब सामने आना बाकी है। मामले में सत्ताधारी दल के नेताओं की शिकायत के बाद विवाद और बढ़ गया है।

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निष्पक्ष जांच की उठी मांग

स्थानीय लोगों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और सरकारी संपत्ति को हटाने के पीछे की वजह स्पष्ट की जाए। साथ ही, यदि जांच में किसी तरह की अनियमितता या सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और हाल ही में बनी इंटरलॉकिंग को उखाड़ने के पीछे की असली वजह क्या निकलकर सामने आती है।

Location :  Budaun

Published :  21 October 2026, 2:29 PM IST