
डिप्टी CM के आवास पहुंचे बॉन्डेड डॉक्टर (IMG: Dynamite News)
Lucknow: राजधानी लखनऊ में सोमवार को उस समय माहौल गरमा गया, जब प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पहुंचे बॉन्डेड डॉक्टरों ने डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के आवास का घेराव कर दिया। डॉक्टर वेतन में कथित असमानता को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि 2 सितंबर को डिप्टी सीएम ने बारिश के बीच उनसे मुलाकात कर मांगों को पूरा करने का भरोसा दिया था, लेकिन 19 दिन बीतने के बाद भी शासनादेश जारी नहीं हुआ। नाराज डॉक्टरों ने अब साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांग पर ठोस फैसला नहीं होता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
बॉन्डेड डॉक्टरों का कहना है कि वे पिछले करीब 14 महीने से समान वेतन की मांग को लेकर शासन और अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। कई बार लखनऊ आकर अधिकारियों के सामने अपनी समस्या रख चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ है। सोमवार को प्रदेश के अलग-अलग जिलों से डॉक्टर एक बार फिर राजधानी पहुंचे। इस बार उन्होंने सीधे डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के आवास का रुख किया। डॉक्टरों का कहना है कि 2 सितंबर को डिप्टी सीएम ने खुद उनसे मुलाकात की थी और उनकी मांगों को पूरा कराने का आश्वासन दिया था। डॉक्टरों के मुताबिक उन्हें 3 सितंबर को दोपहर दो बजे तक शासनादेश जारी होने की बात कही गई थी।
प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों का सबसे बड़ा सवाल वेतन को लेकर है। उनका कहना है कि प्रदेश में बॉन्ड सेवा के तहत काम कर रहे सभी डॉक्टरों के पास MBBS की समान डिग्री है। उन्हें सरकारी सेवा की समान शर्तों के तहत काम करना पड़ता है, लेकिन तैनाती के स्थान के आधार पर उनके मानदेय में बड़ा अंतर है। डॉक्टरों के मुताबिक ग्रामीण इलाकों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र यानी CHC, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र यानी PHC और दूसरे सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में काम कर रहे बॉन्डेड डॉक्टरों को करीब 50 से 55 हजार रुपये महीने का मानदेय मिल रहा है। दूसरी तरफ सरकारी मेडिकल कॉलेजों में बॉन्ड सेवा करने वाले डॉक्टरों को करीब 1.10 लाख रुपये महीने तक भुगतान किया जा रहा है।
बॉन्ड सेवा के तहत डॉक्टरों को सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में अनिवार्य सेवा करनी होती है। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के मुताबिक उन्हें दो साल की सरकारी सेवा करनी होती है या फिर बॉन्ड की शर्तों के तहत करीब 10 लाख रुपये की राशि का भुगतान करना पड़ सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि जब उनसे सेवा के दौरान समान जिम्मेदारियां निभाने की अपेक्षा की जाती है और बॉन्ड की शर्तें लागू होती हैं, तो वेतन में असमानता का सवाल उठना स्वाभाविक है। इसी वजह से डॉक्टर लंबे समय से सरकार से वेतन व्यवस्था में समानता की मांग कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारी डॉक्टर अजय सोलंकी ने कहा कि वह उत्तर प्रदेश में मेडिकल ऑफिसर के तौर पर काम कर रहे हैं। उनके मुताबिक 2 सितंबर को गांधी प्रतिमा पर प्रदर्शन के दौरान डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक खुद डॉक्टरों से मिलने पहुंचे थे। अजय सोलंकी का कहना है कि उस दौरान डिप्टी सीएम ने डॉक्टरों को भरोसा दिलाया था कि उनकी मांग पूरी की जाएगी। डॉक्टरों के मुताबिक उन्हें यह भी आश्वासन दिया गया था कि 3 सितंबर को दोपहर दो बजे तक शासनादेश जारी हो जाएगा।
डॉक्टरों का कहना है कि यह सिर्फ आज का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि वे करीब 14 महीने से अपनी मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के अनुसार कई बार उन्हें आश्वासन मिला, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। अजय सोलंकी ने कहा कि डॉक्टर अपना जिला छोड़कर बार-बार लखनऊ आने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि कई डॉक्टर पिछले कई दिनों से राजधानी में हैं और अधिकारियों से मुलाकात करने की कोशिश कर रहे हैं।
समान वेतन के अलावा प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने लंबित एरियर के भुगतान की मांग भी उठाई है। डॉक्टरों का कहना है कि वे लंबे समय से सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में वेतन में अंतर के साथ लंबित भुगतान का मुद्दा भी उनके लिए महत्वपूर्ण है। डॉक्टरों का कहना है कि सरकार को उनकी मांगों पर स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए, ताकि बार-बार आंदोलन और प्रदर्शन की स्थिति न बने।
प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें अब सिर्फ आश्वासन नहीं चाहिए। वे चाहते हैं कि सरकार समान वेतन को लेकर स्पष्ट शासनादेश जारी करे और लंबित एरियर के भुगतान पर भी फैसला ले। डॉक्टरों का कहना है कि वह स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था का हिस्सा हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में भी मरीजों को सेवाएं देते हैं। ऐसे में वेतन में अंतर से उनमें असंतोष पैदा हो रहा है।
Location : Lucknow
Published : 21 September 2026, 1:11 PM IST