
बलरामपुर में अवैध रक्त कारोबार पर बड़ी कार्रवाई (Img: Dynamite News)
Balrampur: देवीपाटन मंडल से लेकर सिद्धार्थनगर तक इंसानी जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले एक बेहद खौफनाक नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। खून के इस अवैध धंधे में शामिल सफेदपोश अपराधियों और उनके मददगारों की रीढ़ तोड़ने के लिए प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी घेराबंदी शुरू कर दी है। इस पूरे सिंडिकेट के सरगनाओं और गुर्गों पर बेहद सख्त गैंगस्टर एक्ट के तहत शिकंजा कसा जा रहा है, ताकि इनकी अवैध रूप से कमाई गई संपत्तियों को नेस्तनाबूद किया जा सके।
इस महाघोटाले के केंद्र में रहे केके चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित ब्लड सेंटर को हमेशा के लिए बंद करने की तैयारी हो चुकी है। दो जनपदों के औषधि निरीक्षकों ने इस दागदार संस्थान का लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द करने की संयुक्त संस्तुति जिलाधिकारी सहित देश और प्रदेश की सर्वोच्च ड्रग कंट्रोलर संस्थाओं को भेज दी है।
इस पूरे काले साम्राज्य की नींव तब हिली जब पड़ोसी जिले गोंडा के मनकापुर में एक मासूम बच्ची को संक्रमित खून चढ़ा दिया गया, जिससे तड़प-तड़प कर उसकी जान चली गई। इस मासूम की मौत ने स्वास्थ्य महकमे में मचे इस खूनी खेल का भंडाफोड़ कर दिया। पुलिस इस मामले में पहले ही गोंडा स्वास्थ्य विभाग के एक बाबू जगदीश सिंह, उसके बेटे अभिषेक और उनके एक अन्य जोड़ीदार सौरभ श्रीवास्तव को सलाखों के पीछे भेज चुकी है।
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सरकारी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल की मुख्य पैथोलॉजिस्ट डॉ. आकांक्षा शुक्ला इस समय जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। आरोप है कि उन्हीं की मेडिकल डिग्री का इस्तेमाल करके इस पूरे अवैध धंधे को वैधता का चोला पहनाया गया था। सरकारी ब्लड बैंक से निजी सेंटरों में अवैध रूप से खून की सप्लाई करने के मामले में उनकी भूमिका पूरी तरह संदिग्ध पाई गई है। जब मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा गठित विशेष जांच दल ने उनसे तीखे सवाल किए, तो वह बगलें झांकने लगीं।
उन्होंने खुद को बचाने के लिए यह दलील दी कि वह इस सेंटर से पहले ही इस्तीफा दे चुकी थीं, लेकिन जब जांच टीम ने उनसे इस कथित इस्तीफे के आधिकारिक दस्तावेज मांगे, तो उनके पास कोई जवाब नहीं था। वह लगातार अधिकारियों को गुमराह करने की कोशिश करती रहीं, जिससे जांच दल का शक यकीन में बदल गया है कि वह सिर्फ मोहरा नहीं बल्कि इस खूनी गिरोह की एक अहम कढ़ी हैं। अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।
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इस खौफनाक मामले के सामने आने के बाद पूरे जिले के स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। एहतियात के तौर पर प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए क्षेत्र के अन्य निजी ब्लड बैंकों पर भी अचानक छापेमारी की। अपर सीएमओ डॉ. संतोष कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में एक विशेष दस्ते ने तुलसीपुर स्थित पैसिफिक चैरिटेबल ब्लड सेंटर और उतरौला के फ्यूचर केयर चैरिटेबल ब्लड सेंटर का औचक निरीक्षण किया। हालांकि, इन दोनों केंद्रों पर राहत की बात यह रही कि वहां का पूरा लेखा-जोखा, रक्तदाताओं का विवरण और मेडिकल किट पूरी तरह से मानकों के अनुरूप पाए गए।
अधिकारियों ने खुद रक्तदाताओं को फोन मिलाकर उनके विवरण की सत्यता जांची। इसके बावजूद, प्रशासन ने बेहद कड़े लहजे में चेतावनी दी है कि बिना उचित कागजात, सील-मुहर और रक्त नमूनों के खून या प्लेटलेट्स की एक बूंद भी बाहर नहीं जानी चाहिए। साथ ही, समय सीमा पार कर चुके (एक्सपायरी) खून को कड़े नियमों के तहत तुरंत नष्ट करने का हुक्म दिया गया है, ताकि भविष्य में कोई भी गिरोह दोबारा पनप न सके।
Location : Balrampur
Published : 15 July 2026, 2:13 PM IST
Topics : balrampur news Blood Scam Health Department