
फिरोज पप्पू हत्याकांड में पूर्व सांसद रिजवान जहीर बरी (Img: Dynamite News)
Balrampur: उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के चर्चित पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष व सपा नेता फिरोज अहमद उर्फ पप्पू हत्याकांड में न्यायालय का बड़ा फैसला सामने आया है। अदालत ने मुकदमे की सुनवाई पूरी करने के बाद पूर्व सपा सांसद रिजवान जहीर, उनकी बेटी जेबा रिजवान और दामाद रमीज को बेकसूर मानते हुए दोषमुक्त करार दिया है।
वहीं दूसरी ओर मामले के दो अन्य आरोपियों मेराजुल हक उर्फ मामा और महफूज को हत्या की धारा में दोषी ठहराया गया है, जिनकी सजा के ऐलान पर फैसला मंगलवार को सुनाया जाएगा। मामले में कुल छह आरोपी बनाए गए थे, जिनमें से एक आरोपी शकील की विचारण के दौरान ही मौत हो चुकी है। फैसला आते ही न्यायालय परिसर में मौजूद समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई और उन्होंने भावुक होकर पूर्व सांसद को गले लगा लिया।
इस हाई-प्रोफाइल मामले की जड़ें जनवरी 2022 से जुड़ी हैं, जब 4 जनवरी की रात तुलसीपुर के जरवा रोड पर अपने घर लौटते समय पान की दुकान पर रुके फिरोज पप्पू पर जानलेवा हमला हुआ था। हमलावरों ने लोहे की रॉड और चाकू से सिर तथा गले पर ताबड़तोड़ वार कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया था। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में भारी तनाव फैल गया था।
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तब की पुलिस जांच में तत्कालीन एसपी हेमंत कुटियाल ने दावा किया था कि तुलसीपुर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट की दावेदारी और राजनीतिक वर्चस्व की होड़ में यह साजिश रची गई थी। पुलिस ने पूर्व सांसद, उनकी पुत्री और दामाद समेत छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर उन्हें जेल भेजा था। हालांकि, लंबी अदालती लड़ाई के बाद न्यायपीठ ने मुख्य राजनीतिक हस्तियों पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। बरी होने के बाद रिजवान जहीर ने कहा कि उनके ऊपर बेबुनियाद कलंक लगाया गया था, लेकिन आखिरकार सत्य की विजय हुई है।
यदि रिजवान जहीर के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो वे तराई के सियासी क्षितिज पर एक कद्दावर और दबंग नेता के रूप में जाने जाते रहे हैं। बलरामपुर और तुलसीपुर की राजनीति में उनका लंबे समय तक एकछत्र प्रभाव रहा है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में निर्दलीय के साथ-साथ बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के बैनर तले चुनाव लड़कर संसद और विधानसभा तक का सफर तय किया।
तुलसीपुर सीट से कई बार विधायक चुने जाने के साथ ही वे बलरामपुर लोकसभा सीट से सांसद भी रह चुके हैं। तराई क्षेत्र के मुस्लिम और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं के बीच उनकी जबरदस्त पकड़ मानी जाती रही है। हालांकि, उनका पूरा राजनीतिक सफर अक्सर उतार-चढ़ाव, अदालती पचड़ों और विरोधियों के साथ तीखी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से भरा रहा है, लेकिन क्षेत्र की जमीनी राजनीति में उनकी तूती हमेशा बोलती रही है।
Location : Balrampur
Published : 7 August 2026, 7:48 PM IST