
डॉ. अनिल मिश्रा को लेकर एक बार फिर उठे सवाल (Img: AI Generated Image)
Lucknow: चढ़ावा चोरी मामले में ट्रस्ट के पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा को लेकर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। एसआईटी की जांच में उनकी भूमिका को लेकर कई गंभीर बातें सामने आई हैं। रिपोर्ट में ऐसे कई बिंदुओं का जिक्र है जो उनकी जिम्मेदारी और फैसलों पर सवाल उठाते हैं। इसके बावजूद पुलिस ने अब तक उन्हें आरोपी नहीं बनाया है। यही वजह है कि अब इस पूरे मामले पर नई बहस शुरू हो गई है।
जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक दान राशि की गणना, निगरानी और बैंक तक सुरक्षित पहुंचाने की पूरी व्यवस्था तय नियमों के तहत की गई थी। इन नियमों को तैयार करने में डॉ. अनिल मिश्रा की अहम भूमिका बताई गई है। एसआईटी का कहना है कि बाद में गणना प्रक्रिया में बदलाव किए गए, जिससे पूरी व्यवस्था प्रभावित हुई और इसी का फायदा उठाकर करोड़ों रुपये की चोरी संभव हो सकी।
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रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि तय प्रक्रिया में बदलाव किसी सामान्य गलती की बजाय सुनियोजित साजिश की ओर इशारा करता है।
सूत्रों का दावा है कि पुलिस के पास कई ऐसे तथ्य मौजूद हैं जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है। इसके बावजूद अब तक डॉ. अनिल मिश्रा के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया है। बताया जा रहा है कि उनकी पहुंच और प्रभाव को देखते हुए पुलिस फिलहाल ऊपरी स्तर से संकेत मिलने का इंतजार कर रही है।
सूत्र यह भी बताते हैं कि उनसे पूछताछ तो की गई, लेकिन वह सिर्फ औपचारिकता तक सीमित रही। अब सवाल उठ रहा है कि जब जांच रिपोर्ट में इतने गंभीर बिंदु दर्ज हैं तो कार्रवाई में देरी की वजह क्या है।
विवाद बढ़ने के बाद ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। छह जुलाई को दोनों के इस्तीफे स्वीकार भी कर लिए गए। इसके बाद से डॉ. अनिल मिश्रा मंदिर प्रबंधन से अलग हैं।
Location : Lucknow
Published : 17 July 2026, 3:12 PM IST