
तिहाड़ से सहारनपुर और नेपाल तक नेटवर्क! (IMG: Dynamite News)
Saharanpur: सहारनपुर में पकड़ी गई नकली सिक्कों की फैक्ट्री ने पुलिस के सामने एक ऐसे नेटवर्क की कहानी खोल दी है, जिसकी कड़ियां उत्तर प्रदेश से निकलकर नेपाल और थाईलैंड तक जुड़ने का दावा किया जा रहा है। पुलिस की कार्रवाई में सामने आया है कि यह कोई छोटी-मोटी नकली सिक्के बनाने की जगह नहीं थी, बल्कि बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए तैयार किया गया पूरा मैन्यूफैक्चरिंग सेंटर था। फैक्ट्री से हजारों तैयार नकली सिक्के, लाखों रुपये कीमत के अधबने सिक्के, मशीनें और दर्जनों डाई बरामद होने के बाद पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की सप्लाई चेन और पैसों के लेनदेन की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
सहारनपुर में पकड़ी गई फैक्ट्री को देखकर पुलिस भी इसके पैमाने को लेकर हैरान है। पुलिस के मुताबिक यहां छह मशीनों की मदद से रोजाना करीब 10 से 12 हजार नकली सिक्के तैयार करने की क्षमता विकसित कर ली गई थी। छापेमारी के दौरान फैक्ट्री से करीब 6400 तैयार नकली सिक्के बरामद हुए। इसके अलावा करीब पांच लाख रुपये कीमत के अधबने सिक्के भी मिले। पुलिस को 59 डाई मिलीं, जिनमें 39 बिना मुहर वाली और 20 मुहर वाली डाई बताई गई हैं।
पुलिस के हाथ सिर्फ मशीनें और नकली सिक्के ही नहीं लगे हैं। फैक्ट्री से आठ मोबाइल फोन और सात हिसाब-किताब के रजिस्टर भी बरामद किए गए हैं। अब जांच टीम के लिए ये मोबाइल और रजिस्टर बेहद अहम सबूत माने जा रहे हैं। पुलिस इनके जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फैक्ट्री से तैयार नकली सिक्के किन लोगों तक पहुंचाए जाते थे, कौन-कौन एजेंट इस नेटवर्क से जुड़े थे और लेनदेन किस तरह किया जाता था।
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इस पूरे नेटवर्क में उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह को पुलिस अहम कड़ी मान रही है। पुलिस के मुताबिक उपकार साल 2001 से नकली सिक्कों के धंधे से जुड़ा हुआ है। बताया जाता है कि उपकार ने दसवीं तक पढ़ाई की है। शुरुआत में उसका नाम उत्तम नगर की एक ज्वैलरी शॉप में चोरी के मामले में सामने आया। इसके बाद उसने कपड़ों की दुकान चलाने की कोशिश की, लेकिन कारोबार नहीं चला।
उपकार लूथरा पहले भी पुलिस के निशाने पर आ चुका है। साल 2017 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उसे हरियाणा के कोंडली से गिरफ्तार किया था। उस समय उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित होने की बात सामने आई थी। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तारी से बचने के दौरान वह नेपाल में छिपा रहा। वहां भी उसने कथित तौर पर नकली सिक्के बनाने का ठिकाना खड़ा करने की कोशिश की थी।
इस पूरे मामले की सबसे अहम कड़ी तिहाड़ जेल तक जाती है। पुलिस के मुताबिक उपकार लूथरा की मुलाकात जेल में सहारनपुर निवासी हिमांशु उर्फ गुल्लू से हुई थी। जेल की चारदीवारी के भीतर हुई यह मुलाकात बाद में कथित तौर पर एक बड़े नेटवर्क में बदल गई। दोनों के बीच बनी जान-पहचान बाहर आने के बाद भी जारी रही और इसी नेटवर्क का उत्पादन केंद्र सहारनपुर में तैयार होने की बात सामने आई है।
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पुलिस जांच में नकली सिक्कों के इस कारोबार का कथित आर्थिक मॉडल भी सामने आया है। जानकारी के मुताबिक 20 रुपये का एक नकली सिक्का तैयार करने में करीब पांच से छह रुपये की लागत आती थी। इसके बाद यही सिक्का एजेंटों को करीब 12 से 15 रुपये में दिया जाता था। एजेंट आगे इन सिक्कों को बाजार में असली मुद्रा के तौर पर चलाने का काम करते थे।
पुलिस के मुताबिक इस नेटवर्क में करीब आठ लोग अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाल रहे थे। किसी के जिम्मे मशीन और डाई के जरिए सिक्कों का उत्पादन था, तो कोई तैयार माल को एजेंटों तक पहुंचाने का काम करता था। कुछ लोग बाजार में नकली सिक्कों को खपाने की जिम्मेदारी संभालते थे। नेटवर्क में काम को अलग-अलग हिस्सों में बांटने का मकसद भी यही बताया जा रहा है कि अगर कोई एक सदस्य पुलिस के हाथ लग जाए तो पूरा नेटवर्क तुरंत सामने न आए।
Location : Saharanpur
Published : 14 September 2026, 1:45 PM IST