
शेयर बाजार (Img Source: Google)
New Delhi: भारतीय शेयर बाजार में 2026 के दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs का रुख काफी चर्चा में रहा है। एक तरफ विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ चुनिंदा कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा भी रहे हैं। हाई वैल्यूएशन, कमजोर कॉर्पोरेट अर्निंग और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव की वजह से FIIs भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों ने करीब 18 अरब डॉलर की इक्विटी बेच दी है।
इस बीच देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने मंगलवार को 31 मार्च 2026 को समाप्त चौथी तिमाही के लिए नतीजे जारी किए। कंपनी ने बताया कि बीती तिमाही के दौरान उसका कंसोलिडेट नेट मुनाफा 6.45 प्रतिशत घटकर 3,659 करोड़ रुपये रह गया। कंपनी ने पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 3,911.1 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया था।
फाईलिंग के अनुसार, मार्च तिमाही के दौरान कंपनी की परिचालन से कुल आय 28.2 प्रतिशत बढ़कर 52,462.5 करोड़ रुपये हो गई, जो 2024-25 की समान अवधि में 40,920.1 करोड़ रुपये थी। कंपनी ने पहली बार चौथी तिमाही में 50,000 करोड़ रुपये से अधिक की शुद्ध बिक्री का आंकड़ा पार किया। समीक्षाधीन तिमाही में कंपनी का कुल खर्च बढ़कर 48,125.3 करोड़ रुपये हो गया, जो एक साल पहले इसी अवधि में 37,585.5 करोड़ रुपये था।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि विदेशी निवेशक अब पहले जैसी व्यापक खरीदारी नहीं कर रहे। वे “कैलिब्रेटेड अप्रोच” अपना रहे हैं। यानी हर सेक्टर में पैसा लगाने की बजाय उन कंपनियों को चुन रहे हैं, जहां उन्हें लंबे समय की ग्रोथ दिखाई दे रही है। 2026 में FIIs का रुझान खास तौर पर डिजिटल, इंफ्रास्ट्रक्चर, एनर्जी और फाइनेंशियल सेक्टर की कंपनियों में देखा गया है। यह संकेत देता है कि विदेशी निवेशक अभी भी भारतीय अर्थव्यवस्था की लंबी अवधि की क्षमता पर भरोसा रखते हैं।
20 कंपनियों की सूची में सबसे ज्यादा चर्चा BlackBuck को लेकर है। इस कंपनी में FIIs की हिस्सेदारी 11.6 प्रतिशत से बढ़कर 32.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह सबसे बड़ी हिस्सेदारी वृद्धि मानी जा रही है। इसके अलावा Vishal Mega Mart में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 7 प्रतिशत से बढ़कर 22 प्रतिशत हो गई। वहीं South Indian Bank में FIIs का स्टेक 12 प्रतिशत से बढ़कर 24.2 प्रतिशत तक पहुंच गया।
विदेशी निवेशकों की पसंद में टेक्नोलॉजी और फाइनेंस सेक्टर की कई कंपनियां शामिल हैं। MTAR Technologies, Home First Finance और Abans Enterprises जैसे शेयरों में FIIs ने 6 से 10 प्रतिशत तक हिस्सेदारी बढ़ाई है। वहीं एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में GE Vernova T&D India, Hitachi Energy India, Waaree Energies और Polycab India जैसी कंपनियों में विदेशी निवेशकों की भागीदारी बढ़ी है। इसके अलावा सरकारी और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों जैसे BPCL, HPCL, GMR Airports, UPL और Kalpataru में भी FIIs ने अपनी हिस्सेदारी मजबूत की है।
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भारतीय बाजार से विदेशी निवेशकों की निकासी के पीछे कई बड़े कारण हैं। पहला कारण हाई वैल्यूएशन है। कई वैश्विक निवेशकों का मानना है कि भारतीय बाजार अन्य उभरते देशों की तुलना में ज्यादा महंगे स्तर पर ट्रेड कर रहा है। दूसरा कारण AI सेक्टर में वैश्विक अवसर हैं। दुनिया भर का निवेश अब उन बाजारों की तरफ जा रहा है जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और टेक आधारित कंपनियों में तेजी से ग्रोथ की संभावना है। तीसरा कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है। ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, जिससे भारत जैसी तेल आयातक अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ता है। इसके अलावा HSBC और JPMorgan जैसी वैश्विक ब्रोकरेज कंपनियों ने भारतीय बाजार की रेटिंग घटाई है, जिससे FIIs का रुख थोड़ा सतर्क हुआ है।
Location : New Delhi
Published : 28 April 2026, 4:38 PM IST