वैश्विक अनिश्चितता और बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशक सुरक्षित विकल्प तलाश रहे हैं। सोना और चांदी ऐसे ही सुरक्षित निवेश माने जाते हैं। जानिए गोल्ड और सिल्वर में निवेश के अलग-अलग तरीके, फायदे और निवेश से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

सोना (Img Source: Google)
New Delhi: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, महंगाई और शेयर बाजार में बढ़ती अस्थिरता के बीच निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्प तलाश रहे हैं। ऐसे समय में कीमती धातुएं जैसे गोल्ड (Gold) और (Silver) लंबे समय से भरोसेमंद निवेश मानी जाती रही हैं। जब शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ता है, तो कई निवेशक अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित रखने के लिए इन धातुओं में निवेश करना पसंद करते हैं। हालांकि अक्सर निवेशकों के मन में सवाल होता है कि सोना बेहतर है या चांदी और इनमें निवेश करने का सही तरीका क्या है।
सोना और चांदी दोनों को “सेफ हेवन एसेट” माना जाता है। आर्थिक संकट, महंगाई या भू-राजनीतिक तनाव के दौरान इनकी कीमतों में अक्सर तेजी देखने को मिलती है। आमतौर पर सोना अपेक्षाकृत स्थिर और सुरक्षित निवेश माना जाता है, जबकि चांदी की कीमतों में थोड़ी ज्यादा उतार-चढ़ाव हो सकता है। हालांकि कई बार चांदी में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना भी रहती है। इसी वजह से कई विशेषज्ञ दोनों धातुओं में संतुलित निवेश की सलाह देते हैं।
निवेश का सबसे पारंपरिक तरीका है फिजिकल गोल्ड या सिल्वर खरीदना। निवेशक सोने के आभूषण, सिक्के या बार खरीद सकते हैं, जबकि चांदी के सिक्के और बार भी बाजार में उपलब्ध होते हैं। हालांकि इस तरीके में सुरक्षा, स्टोरेज और मेकिंग चार्ज जैसी अतिरिक्त लागत भी शामिल होती है। इसलिए निवेश से पहले इन खर्चों को ध्यान में रखना जरूरी है।
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डिजिटल निवेश के विकल्प भी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। Gold ETF और Silver ETF के जरिए निवेशक बिना फिजिकल धातु खरीदे निवेश कर सकते हैं। ये फंड स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड होते हैं और इनकी कीमत सीधे सोना या चांदी की कीमत से जुड़ी होती है। ETF में निवेश का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें स्टोरेज या सुरक्षा की चिंता नहीं होती।
सोने में निवेश के लिए एक और अच्छा विकल्प Sovereign Gold Bond है, जिसे सरकार जारी करती है। इसमें निवेशकों को ब्याज के साथ-साथ सोने की कीमत बढ़ने का फायदा भी मिलता है। इसके अलावा कई म्यूचुअल फंड भी गोल्ड या सिल्वर से जुड़े निवेश विकल्प प्रदान करते हैं, जो लंबी अवधि के निवेशकों के लिए उपयुक्त हो सकते हैं।
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विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को अपने कुल पोर्टफोलियो का केवल एक हिस्सा ही सोना और चांदी में लगाना चाहिए। आम तौर पर कुल निवेश का लगभग 5 से 15 प्रतिशत हिस्सा इन धातुओं में निवेश करना संतुलित रणनीति माना जाता है।