
प्रतीकात्मक छवि (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
New Delhi: अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में गुरुवार को बड़ा उथल-पुथल देखने को मिला, जब ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत अचानक बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। यह उछाल पिछले कई महीनों के रिकॉर्ड को तोड़ने वाला माना जा रहा है। केवल एक दिन में करीब 3 डॉलर की बढ़ोतरी के साथ ब्रेंट क्रूड 122 डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुंच गया। इस तेज बढ़त ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में चिंता बढ़ा दी है।
तेल कीमतों में इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव बताया जा रहा है। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सैन्य तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि यह तनाव और बढ़ता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
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ईरान ने चेतावनी दी है कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही को बाधित कर सकता है। यह मार्ग दुनिया के बड़े हिस्से के तेल निर्यात का प्रमुख रास्ता है। यदि यहां किसी प्रकार की रुकावट आती है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर संकट पैदा हो सकता है। इसी ‘सप्लाई फियर’ के चलते बाजार में घबराहट बढ़ी है और निवेशकों ने तेल खरीदना शुरू कर दिया है, जिससे कीमतें और बढ़ गई हैं।
इसके साथ ही यूएई द्वारा OPEC और OPEC+ से बाहर निकलने के संकेतों ने भी बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। वहीं, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को 3.5% से 3.75% के बीच स्थिर रखने के फैसले ने भी वैश्विक आर्थिक माहौल को प्रभावित किया है। इन सभी कारणों ने मिलकर कच्चे तेल की कीमतों को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।
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भारत अपनी जरूरत का लगभग 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। यदि ब्रेंट क्रूड लंबे समय तक 120 डॉलर के ऊपर बना रहता है, तो पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है।
तेल महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ेगी, जिसका असर रोजमर्रा की चीजों जैसे सब्जी, फल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ेगा। इससे महंगाई दर में भी बढ़ोतरी की आशंका है।
कच्चे तेल के दाम बढ़ने के साथ-साथ डॉलर की मजबूती ने भी भारत पर दबाव बढ़ा दिया है। चूंकि भारत तेल का भुगतान डॉलर में करता है, इसलिए आयात बिल और बढ़ जाएगा। इससे चालू खाता घाटा बढ़ने का खतरा भी पैदा हो सकता है, जिसका असर रुपये की वैल्यू पर पड़ेगा।
Location : New Delhi
Published : 30 April 2026, 9:48 AM IST