
रूस ने खोला 700 करोड़ टन तेल का खजाना (IMG: Gemini)
New Delhi: रूस और भारत की दोस्ती अब सिर्फ कूटनीतिक रिश्तों तक सीमित नहीं रह गई है। ऊर्जा के मोर्चे पर दोनों देशों की साझेदारी आने वाले समय में वैश्विक तेल बाजार की तस्वीर बदल सकती है। रूस के साइबेरिया में विकसित हो रहे Vostok Oil Project को लेकर बड़े-बड़े दावे सामने आ रहे हैं। इस प्रोजेक्ट को रूस के सबसे महत्वाकांक्षी तेल प्रोजेक्ट्स में गिना जा रहा है और इसकी खासियत सिर्फ इसके विशाल भंडार में नहीं, बल्कि इसकी लोकेशन और भविष्य की सप्लाई चेन में भी है।
Vostok Oil Project रूस के उत्तरी साइबेरिया के तैमीर प्रायद्वीप से जुड़ी एक विशाल तेल परियोजना है। इसे रूसी ऊर्जा कंपनी Rosneft की प्रमुख परियोजनाओं में माना जाता है। इस क्षेत्र में तेल के बड़े भंडार होने का दावा किया जाता है। उपलब्ध परियोजना अनुमानों के मुताबिक यहां लगभग 7 अरब टन तेल के संसाधन होने की बात कही गई है। यही वजह है कि रूस इस परियोजना को अपने भविष्य के तेल उत्पादन के लिए बेहद अहम मानता है।
रूस की योजना Vostok Oil Project में उत्पादन को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाने की है। परियोजना से जुड़ा लक्ष्य 2027 के आसपास बड़े स्तर पर उत्पादन शुरू करने का रहा है। रूसी योजना के मुताबिक परियोजना की उत्पादन क्षमता लगभग 10 करोड़ टन सालाना तक पहुंचाई जा सकती है, जबकि शुरुआती चरण में उत्पादन का लक्ष्य इससे कम रखा गया है। इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में यहां से निकलने वाला कच्चा तेल वैश्विक बाजार में रूस की स्थिति को और मजबूत कर सकता है।
Vostok Oil Project की सबसे बड़ी चुनौती इसका बेहद कठिन भौगोलिक क्षेत्र है। तैमीर प्रायद्वीप का इलाका आर्कटिक क्षेत्र के करीब है, जहां सर्दियों में तापमान बेहद नीचे चला जाता है। ऐसे इलाके में तेल उत्पादन के लिए सिर्फ कुएं खोदना ही चुनौती नहीं है। वहां सड़क, पाइपलाइन, एयरपोर्ट, आवास, बिजली और लॉजिस्टिक्स जैसी पूरी सप्लाई चेन तैयार करनी पड़ती है।
अब सबसे बड़ा सवाल भारत का है। भारत दुनिया के बड़े तेल आयातकों में शामिल है और अपनी घरेलू जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से पूरा करता है। ऐसे में भारत के लिए सिर्फ तेल की कीमत महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि तेल किन देशों से और किन समुद्री रास्तों के जरिए आ रहा है।
भारत के ऊर्जा आयात के लिए Strait of Hormuz बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। खाड़ी क्षेत्र से आने वाला बड़ी मात्रा में कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर दुनिया के बाजारों तक पहुंचता है। लेकिन Hormuz का महत्व जितना ज्यादा है, जोखिम भी उतना ही ज्यादा है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने, सैन्य टकराव या समुद्री परिवहन में किसी बड़ी बाधा की स्थिति में तेल की सप्लाई और कीमत दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
Vostok Oil Project की सबसे अहम खासियत इसका परिवहन नेटवर्क है। परियोजना से निकलने वाले तेल को लंबी पाइपलाइन के जरिए आर्कटिक क्षेत्र में बने टर्मिनल तक पहुंचाने की योजना है। इसके बाद कच्चे तेल को टैंकरों के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक भेजा जा सकता है। इस रूट की वजह से रूस से भारत आने वाले तेल के लिए पारंपरिक पश्चिम एशियाई सप्लाई रूट पर निर्भरता कम करने का विकल्प बन सकता है।
Location : New Delhi
Published : 14 September 2026, 1:26 PM IST