
IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार (Img- X)
New Delhi: कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) की भर्ती परीक्षा में कथित प्रश्नपत्र लीक मामले के बाद IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार का नाम चर्चा में है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है। सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुए शिवकुमार ने कहा कि सरकारी भर्तियों में होने वाले भ्रष्टाचार को सरकार गंभीरता से ले रही है, क्योंकि इससे भर्ती प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा कम होता है। उन्होंने कहा कि सरकार शासन में पारदर्शिता और ईमानदारी बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
गंगवार कर्नाटक कैडर के 2016 बैच के IAS अधिकारी हैं और मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बरेली के रहने वाले हैं। उन्होंने IIT कानपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया, निजी क्षेत्र में काम किया और फिर सिविल सेवा परीक्षा पास कर प्रशासनिक सेवा में पहुंचे। अब उनके करियर और KPSC मामले को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बरेली के निवासी बताए जाते हैं। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद उन्होंने कुछ समय निजी क्षेत्र में नौकरी की। इसके बाद उन्होंने सिविल सेवा में जाने का फैसला किया और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा की तैयारी शुरू की। तकनीकी शिक्षा से प्रशासनिक सेवा तक का उनका सफर अब मौजूदा मामले के कारण फिर चर्चा में है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, गंगवार ने वर्ष 2015 की UPSC सिविल सेवा परीक्षा में 314वीं रैंक हासिल की थी। इस सफलता के बाद वह भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित हुए और उन्हें कर्नाटक कैडर मिला। 2016 बैच के IAS अधिकारी के रूप में उन्होंने राज्य में अलग-अलग प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालीं। सिविल सेवा में चयन के बाद उनका करियर जिला प्रशासन, प्रशिक्षण संस्थानों और सरकारी बोर्डों से जुड़े पदों तक पहुंचा। KPSC में परीक्षा नियंत्रक की भूमिका निभाने के दौरान ही उनका नाम भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं के मामले से जुड़ा।
गंगवार जनवरी 2024 से मार्च 2026 तक कर्नाटक लोक सेवा आयोग में परीक्षा नियंत्रक के पद पर कार्यरत थे। इस पद पर परीक्षा से जुड़ी गोपनीय प्रक्रियाओं और व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण होती है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि जनवरी 2026 में आयोजित पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले कथित तौर पर लीक हुआ। CID के अनुसार, प्रश्नपत्र कम से कम 10 अभ्यर्थियों तक पहुंचा, जिनमें से कुछ अंतिम मेरिट सूची में ऊंची रैंक पर आए।
KPSC भर्ती में घोटाला करने का आरोप (Img- X)
गंगवार को 29 अगस्त 2026 को कथित प्रश्नपत्र लीक मामले में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी कथित वित्तीय लेनदेन और मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच की। जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया है कि बिचौलियों के जरिए अभ्यर्थियों से प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के बदले बड़ी रकम ली गई। 24 अक्टूबर को कर्नाटक सरकार ने गंगवार के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दी। यह मंजूरी कानूनी कार्यवाही आगे बढ़ाने का प्रक्रियागत कदम है, दोष सिद्ध होने का फैसला नहीं।
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KPSC भर्ती परीक्षा से जुड़े आरोपों ने सरकारी नौकरियों की चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती में कथित अनियमितताओं की जांच CID और ED कर रही हैं। सरकार ने भ्रष्टाचार के प्रति सख्त रुख अपनाने की बात कही है। गंगवार के खिलाफ आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत में साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा। इस मामले का असर केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं, बल्कि भर्ती परीक्षाओं में अभ्यर्थियों के भरोसे से भी जुड़ा है।
Location : New Delhi
Published : 24 October 2026, 5:34 PM IST