मुंगेर में गंगा का कहर, बाढ़ में डूबा घर तो थर्मोकोल की नाव बनी सहारा; पत्नी को लेकर पानी में उतरा पति

मुंगेर में गंगा खतरे के निशान से 70 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। बरियारपुर के मुरला मुशहरी में बाढ़ से घर डूबने के बाद जीतो सदा ने थर्मोकोल और बांस से अस्थायी नाव बनाई और पत्नी पार्वती को लेकर सुरक्षित स्थान की ओर निकले। उनका सात फेरों का वचन चर्चा में है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 15 September 2026, 10:36 AM IST

Munger: बिहार के मुंगेर में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने से तटवर्ती इलाकों में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। गंगा खतरे के निशान से करीब 70 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। बरियारपुर प्रखंड के मुरला मुशहरी गांव में बाढ़ का पानी घरों में घुस गया है। इसी संकट के बीच पति-पत्नी के अटूट साथ की ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया।

घर डूबा तो खुद बनाई नाव

मुरला मुशहरी निवासी जीतो सदा का घर बाढ़ के पानी में पूरी तरह डूब गया। चारों तरफ पानी भर जाने के बाद परिवार के सामने सुरक्षित स्थान तक पहुंचने की चुनौती खड़ी हो गई। प्रशासनिक नाव नहीं मिलने पर जीतो ने हिम्मत जुटाई और कबाड़ में पड़े थर्मोकोल के टुकड़ों, बोरियों और बांस की फट्टियों को रस्सियों से बांधकर एक अस्थायी नाव यानी चांचर तैयार की।

इसके बाद उन्होंने अपनी पत्नी पार्वती देवी को उस पर बैठाया और खुद बांस की लग्गी के सहारे पानी के तेज बहाव के बीच नाव को आगे बढ़ाने लगे।

सात फेरों का वचन बाढ़ में भी निभाया

डगमगाती थर्मोकोल की नाव पर बैठी पार्वती देवी के चेहरे पर घर और सामान डूबने का दर्द साफ दिखाई दे रहा था। वहीं जीतो सदा पानी के बीच लगातार संतुलन साधते हुए पत्नी को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे।

इस जोखिम भरे सफर के बारे में पूछे जाने पर जीतो ने कहा कि सात फेरे लेते समय जीवनभर सुख-दुख में साथ रहने की कसमें खाई थीं। जब सैलाब में घर डूब गया तो ऐसी स्थिति में वह अपनी जीवनसंगिनी को अकेला कैसे छोड़ सकते थे। उनका कहना था कि घर भले ही डूब गया हो, लेकिन जब तक सांस है, पत्नी का साथ नहीं छूटेगा।

मोबाइल में गंदी चीजें देखने लगा क्लास-4 का छात्र, बहन के साथ हरकत के बाद मचा हड़कंप; टीचर की भी बनाई थी तस्वीरें

कई गांवों का संपर्क टूटा

गंगा के लगातार खतरे के निशान से ऊपर बहने के कारण बरियारपुर प्रखंड के निचले इलाकों में स्थिति गंभीर बनी हुई है। कई गांवों का सड़क संपर्क प्रभावित हो गया है। ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने के लिए निजी स्तर पर तैयार की गई नावों और दूसरे स्थानीय साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है।

मुरला मुशहरी के कई परिवार अपने मवेशियों और जरूरी सामान के साथ रेलवे ट्रैक, राष्ट्रीय राजमार्ग और तटबंधों के किनारे शरण लेने को मजबूर हैं।

सरकारी मदद की मांग

बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों ने प्रशासन से पर्याप्त संख्या में सरकारी नावों का संचालन कराने की मांग की है। इसके अलावा प्रभावित परिवारों के लिए सूखा राशन और पॉलीथिन शीट उपलब्ध कराने की भी अपील की गई है।

मुंगेर में गंगा का बढ़ता जलस्तर जहां लोगों के घर और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित कर रहा है, वहीं जीतो और पार्वती की कहानी यह दिखाती है कि मुश्किल की घड़ी में साथ निभाने का संकल्प कितना मजबूत हो सकता है।

Location :  Munger

Published :  15 September 2026, 10:28 AM IST