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पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव
Purnia: बिहार के पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव अपने एक विवादित बयान को लेकर चर्चा में हैं। मधेपुरा में आयोजित ‘खुरदा महोत्सव’ के उद्घाटन समारोह के दौरान उन्होंने लड़कियों और महिलाओं से छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ बेहद सख्त कार्रवाई की बात कही। उन्होंने कथित तौर पर ऐलान किया कि बेटियों से छेड़छाड़ करने वालों का हाथ काटकर लाने वाले व्यक्ति को वह 2 लाख रुपये का इनाम देंगे। उनके इस बयान ने महिला सुरक्षा, कानून और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर बहस छेड़ दी है।
महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा है, लेकिन क्या किसी व्यक्ति को खुद सजा देने या ऐसी सजा का ऐलान करने का अधिकार है? भारतीय कानून इस संबंध में स्पष्ट व्यवस्था करता है कि अपराध की जांच, आरोपी के खिलाफ मुकदमा और सजा का फैसला कानूनी प्रक्रिया के तहत होता है।
भारत में किसी व्यक्ति को अपराध के आरोप में खुद सजा देने का अधिकार नहीं है। किसी का हाथ काटना गंभीर हिंसक कृत्य है और परिस्थितियों के आधार पर ऐसा करने वाले के खिलाफ गंभीर आपराधिक धाराओं में कार्रवाई हो सकती है। इसी तरह, किसी को ऐसा करने के लिए उकसाने या इसके बदले इनाम देने की घोषणा की कानूनी स्थिति भी बयान के सटीक शब्दों और परिस्थितियों के आधार पर जांच का विषय हो सकती है।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत अपराधों के लिए सजा का निर्धारण कानून के अनुसार होता है। किसी आरोपी को दोषी ठहराने और सजा देने का अधिकार सक्षम न्यायालय को है। इसलिए महिला सुरक्षा के नाम पर भी कानून से बाहर जाकर हिंसक दंड देना वैध नहीं हो जाता।
महिलाओं और लड़कियों के साथ छेड़छाड़, उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाने, पीछा करने और उनकी इच्छा के विरुद्ध बार-बार संपर्क करने जैसे कृत्यों के लिए भारतीय न्याय संहिता में अलग-अलग प्रावधान हैं। अपराध की प्रकृति और परिस्थितियों के अनुसार आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में कार्रवाई की जा सकती है।
यदि पीड़िता नाबालिग है, तो मामले के तथ्यों के आधार पर यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO) भी लागू हो सकता है। इस कानून में बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के लिए कठोर दंड का प्रावधान है। ऐसे मामलों में शिकायत दर्ज कराना और पुलिस तथा न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से कार्रवाई कराना जरूरी है।
किसी पंचायत, संगठन या व्यक्ति को कानून से अलग अपनी अदालत चलाकर किसी आरोपी को शारीरिक दंड देने का अधिकार नहीं है। किसी का हाथ काटने, मारपीट करने या हिंसा के जरिए सजा देने जैसे कृत्य कानून के दायरे में अपराध बन सकते हैं। हालांकि, किसी विशेष बयान या इनाम की घोषणा के खिलाफ कौन-सी कानूनी कार्रवाई बनती है, यह उसके सटीक शब्दों, मंशा और परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
पप्पू यादव के बयान के संदर्भ में भी मुख्य सवाल यही है कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त कार्रवाई की मांग और कानून अपने हाथ में लेने के बीच की सीमा कहां है। महिला सुरक्षा के लिए प्रभावी पुलिस कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया जरूरी है, न कि निजी तौर पर सजा देने की व्यवस्था।
अगर किसी महिला या बच्ची के साथ छेड़छाड़, पीछा करने या उत्पीड़न की घटना होती है, तो पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। तत्काल खतरे की स्थिति में आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर 112 पर कॉल किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सहायता के लिए 1090 वीमेन पावर लाइन भी उपलब्ध है।
इसके अलावा, पीड़ित महिलाएं राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) के आधिकारिक माध्यमों से भी शिकायत कर सकती हैं। नाबालिग के साथ यौन अपराध की स्थिति में पुलिस को सूचना देना और बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
पप्पू यादव के बयान ने महिला सुरक्षा के मुद्दे पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है, लेकिन कार्रवाई संविधान और कानून के दायरे में ही होनी चाहिए।
Location : Purnia
Published : 18 October 2026, 12:46 PM IST
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