Bihar Teachers Transfer Rule: महिला शिक्षकों को मिलेगी खास प्राथमिकता, 40+ उम्र वालों को बड़ा फायदा

बिहार शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के स्थानांतरण को लेकर नई नियमावली तैयार की है। इसमें महिला शिक्षकों, गंभीर बीमारी से जूझ रहे शिक्षकों और दिव्यांग शिक्षकों को प्राथमिकता देने का प्रावधान किया गया है। वहीं गलत तरीके से वरीयता का दावा करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। जानिए नई ट्रांसफर पॉलिसी में क्या-क्या बदलाव किए गए हैं।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 26 June 2026, 4:10 PM IST

Patna: बिहार में शिक्षकों के स्थानांतरण को लेकर शिक्षा विभाग की नई नियमावली ने कई अहम बदलावों को जगह दी है। अब शिक्षकों के तबादले में सिर्फ प्रशासनिक जरूरतों को ही आधार नहीं बनाया जाएगा, बल्कि उनकी व्यक्तिगत परिस्थितियों, स्वास्थ्य स्थिति और सामाजिक स्थिति को भी ध्यान में रखा जाएगा। नई व्यवस्था में 40 साल से अधिक उम्र की अविवाहित महिला शिक्षकों, कानूनी रूप से अलग रह रही महिला शिक्षकों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे शिक्षकों को विशेष प्राथमिकता देने का प्रावधान किया गया है।

40 साल से अधिक उम्र की महिला शिक्षकों को मिलेगी प्राथमिकता

नई नियमावली में महिला शिक्षकों को लेकर विशेष प्रावधान किया गया है। इसके तहत अगर कोई महिला शिक्षक अविवाहित है और उसकी उम्र 40 वर्ष से अधिक है तो स्थानांतरण के दौरान उसकी पसंद को प्राथमिकता दी जाएगी। इसका मकसद ऐसी शिक्षिकाओं को उनकी सुविधा के अनुसार कार्यस्थल उपलब्ध कराना है ताकि उन्हें नौकरी के साथ निजी जीवन में भी परेशानियों का सामना न करना पड़े। इसके अलावा ऐसी महिला शिक्षक जो कानूनी रूप से अपने पति से अलग रह रही हैं, उन्हें भी स्थानांतरण में वरीयता दी जाएगी। शिक्षा विभाग ने माना है कि इस तरह की परिस्थितियों में शिक्षिकाओं को अपने परिवार और निजी जिम्मेदारियों को संभालने में दिक्कतें आती हैं, इसलिए उन्हें राहत देने के लिए यह व्यवस्था बनाई गई है।

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कम शिक्षक वाले स्कूलों में नहीं मिलेगा विशेष लाभ

हालांकि नई नियमावली में यह भी साफ किया गया है कि हर परिस्थिति में वरीयता का लाभ नहीं दिया जाएगा। जिन विद्यालयों में स्वीकृत शिक्षकों की संख्या चार से कम है, वहां वरीयता श्रेणी वाले शिक्षकों के पदस्थापन पर विचार नहीं किया जाएगा। विभाग का मानना है कि स्कूलों में शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना भी जरूरी है। इसलिए ऐसे विद्यालय जहां पहले से शिक्षकों की कमी है, वहां से या वहां पर स्थानांतरण को लेकर अलग नियम लागू होंगे।

गंभीर बीमारी से पीड़ित शिक्षकों को भी मिलेगी राहत

नई स्थानांतरण नीति में बीमारी को लेकर भी कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। गंभीर बीमारियों से पीड़ित शिक्षकों को तबादले में विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। इसमें कैंसर, ओपन हार्ट सर्जरी, एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट और अंग प्रत्यारोपण जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को शामिल किया गया है। ऐसे मामलों में शिक्षक को स्वयं बीमारी होने पर 20 प्रतिशत वरीयता देने का प्रावधान किया गया है। वहीं पत्नी की बीमारी के मामले में 10 प्रतिशत और 18 वर्ष से कम उम्र के आश्रित बच्चे की गंभीर बीमारी की स्थिति में भी 10 प्रतिशत वरीयता दी जाएगी।

इसके अलावा एकल किडनी, किडनी ट्रांसप्लांट, डायलिसिस, ब्रेन ट्यूमर, न्यूरो सर्जरी, बोन टीबी और गंभीर टीबी जैसी बीमारियों से प्रभावित शिक्षकों को भी स्थानांतरण में प्राथमिकता मिलेगी। पक्षाघात से पीड़ित शिक्षक भी इस श्रेणी में शामिल किए गए हैं।

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दिव्यांग शिक्षकों के लिए भी खास व्यवस्था

दिव्यांगता के आधार पर भी शिक्षकों को स्थानांतरण में राहत देने की व्यवस्था की गई है। नई नियमावली के अनुसार 80 से 100 प्रतिशत तक दिव्यांगता वाले शिक्षक, जिनमें दृष्टि बाधा, अस्थि बाधा या श्रवण बाधा शामिल है, उन्हें वरीयता दी जाएगी। विभाग ने यह भी तय किया है कि बीमारी और दिव्यांगता के आधार पर मिलने वाले लाभ के लिए आवेदनों की जांच की जाएगी। इसके लिए शिक्षा विभाग के स्तर पर मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाएगा, जो शिक्षकों के दावों की पुष्टि करेगा।

वरीयता का दावा गलत निकला तो होगी कार्रवाई

नई नियमावली में गलत जानकारी देकर वरीयता हासिल करने वालों पर सख्ती का भी प्रावधान किया गया है। अगर किसी शिक्षक का वरीयता दावा जांच में गलत पाया जाता है तो संबंधित जिले के जिला शिक्षा अधिकारी के स्तर से इसकी जांच कराई जाएगी। जांच के दौरान शिक्षक को अपना पक्ष रखने के लिए सात दिन का समय दिया जाएगा। अगर दावा गलत साबित होता है तो संबंधित शिक्षक के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई के साथ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

Location :  Patna

Published :  26 June 2026, 4:10 PM IST