
बिहार में राजनीतिक उथल-पुथल का अंत
Patna: मार्च के पहले सप्ताह से बिहार में चल रही राजनीतिक हलचल अगले सप्ताह समाप्त होने की संभावना है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। इसके बाद 12-13 अप्रैल को वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं।
भाजपा ने शुक्रवार को महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। बैठक में बिहार में नई सरकार के गठन और मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इस बैठक में बिहार के कोर ग्रुप के नेता, दिल्ली के शीर्ष नेता और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन शामिल होंगे। साथ ही नीतीश कुमार पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह से भी मिलेंगे।
वर्तमान उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार माने जा रहे हैं। वे कुशवाहा जाति से आते हैं, जो जदयू के वोट बैंक में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। 2005 से नीतीश कुमार ने कुर्मी, कोइरी (कुशवाहा), अति पिछड़ा, दलित और पसमांदा मुसलमानों के साथ मजबूत वोट बैंक बनाया है। सम्राट चौधरी का सामाजिक समीकरण में स्वीकार्य होना भाजपा के लिए रणनीतिक लाभ होगा।
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भाजपा में कई गुट अपने-अपने उम्मीदवारों को आगे बढ़ा रहे हैं। केंद्रीय राज्य गृह मंत्री नित्यानंद राय सहित कई नेताओं के नाम चर्चा में हैं। हालांकि, सम्राट चौधरी नीतीश कुमार के विश्वासपात्र हैं और जदयू विधायकों में भी उनकी स्वीकार्यता अधिक है, जो उन्हें CM पद के लिए मजबूत दावेदार बनाती है।
जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने अपने सरकारी आवास के बाहर पोस्टर लगाकर नया संदेश दिया है। पोस्टर में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके बेटे निशांत कुमार की तस्वीर के साथ लिखा गया है, ‘मजबूत विरासत, भविष्य दमदार, निशांत कुमार हैं तैयार’। यह संकेत देता है कि जदयू में पार्टी की अगली पीढ़ी को लेकर भी तैयारी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बिहार में सत्ता परिवर्तन के इस दौर में भाजपा और जदयू दोनों ही अपने वोट बैंक को सुरक्षित रखना चाहते हैं। कुशवाहा और अन्य जातिगत समीकरण को ध्यान में रखते हुए नेतृत्व का चयन किया जा रहा है। कोई भी अचानक बदलाव या छेड़छाड़ वोट बैंक को प्रभावित कर सकती है, इसलिए रणनीति बेहद संवेदनशील है।
Location : Patna
Published : 9 April 2026, 11:31 AM IST