
सड़क नहीं मिलने से ट्रैक्टर में अस्पताल जा रही प्रसूता की मौत (IMG: Dynamite News)
Bagaha: बिहार के पश्चिमी चंपारण के बगहा अनुमंडल से एक बार फिर ग्रामीण इलाकों की बदहाल सड़क और स्वास्थ्य व्यवस्था की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो सरकारी दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। रामनगर प्रखंड के गोबरहिया थाना क्षेत्र स्थित सिंगड़हवा दोन की 22 वर्षीय सुमन देवी की प्रसव पीड़ा के दौरान अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। परिजनों के अनुसार, गांव से बाहर निकलने के लिए बेहतर सड़क नहीं होने के कारण उन्हें प्रसूता को ट्रैक्टर के सहारे अस्पताल ले जाना पड़ा। रास्ते में हरहा नदी में ट्रैक्टर फंस गया और अस्पताल पहुंचने में हुई देरी के बीच सुमन की हालत बिगड़ती चली गई।
सिंगड़हवा दोन निवासी प्रकाश उरांव की 22 वर्षीय पुत्री सुमन देवी को रविवार शाम अचानक तेज प्रसव पीड़ा हुई। परिवार के लोग बिना देर किए उसे इलाज के लिए हरनाटांड़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाने की कोशिश में जुट गए। लेकिन गांव से मुख्य सड़क तक पहुंचना ही उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया। ग्रामीण क्षेत्र में सड़क की स्थिति खराब होने के कारण सामान्य वाहन से प्रसूता को अस्पताल ले जाना आसान नहीं था। ऐसे में परिजनों को ट्रैक्टर का सहारा लेना पड़ा। परिवार की उम्मीद थी कि किसी तरह अस्पताल पहुंचकर सुमन को समय पर इलाज मिल जाएगा, लेकिन रास्ते ने एक बार फिर उनकी मुश्किल बढ़ा दी।
अस्पताल जाने के दौरान हरहा नदी में ट्रैक्टर फंस गया। इसके बाद प्रसूता को अस्पताल पहुंचाने में काफी समय लग गया। परिजन मदद के लिए जूझते रहे, लेकिन तब तक सुमन की हालत गंभीर हो चुकी थी। अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा है। एक युवा महिला की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। ग्रामीणों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर गांव तक सुगम सड़क होती और आपात स्थिति में समय पर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो पाती तो क्या सुमन को बचाया जा सकता था?
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सिंगड़हवा दोन और आसपास के इलाकों में सड़क और आवागमन की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। बरसात के मौसम में स्थिति और खराब हो जाती है। नदी-नालों और खराब रास्तों के कारण मरीजों को अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन जाता है। सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर रूप से बीमार लोगों को होती है। ग्रामीणों का आरोप है कि आपात स्थिति में एंबुलेंस या अन्य वाहन गांव तक आसानी से नहीं पहुंच पाते। ऐसे में मरीजों को कभी ट्रैक्टर तो कभी अन्य साधनों के सहारे मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है।
सुमन देवी की मौत के बाद अब ग्रामीण इलाके की बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल फिर उठने लगे हैं। सड़क निर्माण और स्वास्थ्य सुविधा को लेकर किए जाने वाले दावों के बीच जमीनी हकीकत कितनी अलग है, यह घटना उसकी एक दर्दनाक तस्वीर पेश करती है।ग्रामीणों ने प्रशासन से सिंगड़हवा दोन तक पक्की और सुगम सड़क बनाने, बरसात के दौरान नदी पार करने की सुरक्षित व्यवस्था करने तथा गांव के लोगों को समय पर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है। सवाल सिर्फ एक मौत का नहीं है। सवाल यह है कि आखिर कब तक खराब सड़क और दुर्गम रास्तों के कारण ग्रामीणों को इलाज तक पहुंचने के लिए अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ेगी?
Location : Bagaha
Published : 10 August 2026, 7:49 PM IST