
दिल्ली-एनसीआर की हवा सुधारने को बड़ा कदम (सोर्स- Pinterest)
New Delhi: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए प्रशासन ने एक कड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के नए आदेश के अनुसार, आने वाले समय में दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर पेट्रोल, डीजल और सीएनजी से चलने वाले छोटे मालवाहक वाहनों की एंट्री नए पंजीकरण (Registration) के स्तर पर बंद कर दी जाएगी। यह बदलाव हवा को जहरीला होने से बचाने और हरित परिवहन (Green Mobility) को बढ़ावा देने के लिए किया गया है।
यह नया नियम एन-1 (N1) कैटेगरी के तहत आने वाले सभी हल्के मालवाहक वाहनों (Light Goods Vehicles - LGVs) पर लागू होगा। इस कैटेगरी में 3.5 टन (3500 किलोग्राम) से कम कुल वजन वाले वे सभी छोटे कमर्शियल वाहन आते हैं जो सामान ढोने के काम में लाए जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से ई-कॉमर्स कंपनियों की डिलीवरी वैन, कूरियर गाड़ियां, छोटे पिकअप ट्रक और टेम्पो शामिल हैं। यानी अब व्यापारिक गतिविधियों के लिए छोटे वाहनों का बेड़ा तैयार करते समय कारोबारियों को पूरी तरह इलेक्ट्रिक विकल्पों की तरफ शिफ्ट होना होगा।
इस बदलाव को एक साथ पूरे क्षेत्र में थोपने के बजाय चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि परिवहन और व्यापार से जुड़े लोग खुद को ढाल सकें:
1 जनवरी 2027 से: सबसे पहले यह नियम मुख्य दिल्ली में लागू होगा, जहाँ पेट्रोल, डीजल और सीएनजी से चलने वाले छोटे मालवाहकों का नया रजिस्ट्रेशन पूरी तरह प्रतिबंधित हो जाएगा और केवल इलेक्ट्रिक गाड़ियां ही पंजीकृत होंगी।
1 जुलाई 2027 से: उच्च यातायात घनत्व वाले एनसीआर के प्रमुख शहर जैसे गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) में भी यह पाबंदी प्रभावी हो जाएगी।
1 जनवरी 2028 से: इसके बाद एनसीआर के शेष बचे बाहरी जिलों में भी पेट्रोल-डीजल आधारित छोटे कमर्शियल वाहनों के नए रजिस्ट्रेशन पर रोक लगा दी जाएगी।
इस नीति का एक बड़ा और चौंकाने वाला पहलू यह है कि इसमें पर्यावरण-अनुकूल माने जाने वाले सीएनजी (CNG) ईंधन को भी नए छोटे कमर्शियल वाहनों के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। CAQM का तर्क है कि हालांकि सीएनजी पारंपरिक डीजल के मुकाबले प्राथमिक कणों (Primary Particulate Matter) का उत्सर्जन कम करती है, लेकिन इससे भारी मात्रा में नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) पैदा होता है, जो बाद में खतरनाक पीएम 2.5 प्रदूषण का कारण बनता है। आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, ये छोटे मालवाहक वाहन कुल सक्रिय वाहनों का महज 1.2% हैं, लेकिन इनसे निकलने वाले पीएम उत्सर्जन की हिस्सेदारी लगभग 3.3% है। यही वजह है कि प्रशासन अब आधे-अधूरे उपायों के बजाय सीधे शून्य-उत्सर्जन (Zero Emission) यानी इलेक्ट्रिक तकनीक को अनिवार्य बना रहा है।
बड़ी खबर: जेल में बंद कांग्रेस के पूर्व सासंद सज्जन कुमार का निधन, दंगा मामले में काट रहे थे सजा
कारोबारियों और वाहन मालिकों के लिए राहत की बात यह है कि यह पूरा नियम केवल नए वाहनों के पंजीकरण पर लागू होता है। यानी पहले से रजिस्टर्ड और सड़कों पर दौड़ रही पेट्रोल, डीजल या सीएनजी की पुरानी गाड़ियां अपनी तय उम्र तक चलती रहेंगी, उन पर तुरंत कोई रोक नहीं लगाई गई है। यह पाबंदी सिर्फ भविष्य की नई खरीद पर लागू होगी।
Location : New Delhi
Published : 20 August 2026, 3:20 PM IST