उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले से चौंकाना वाला मामला सामने आया है। यहां पर पेयजल की समस्या को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। अब इसको लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन की उदासीनता का कड़ा विरोध जताया है।

Mainpuri: उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में पेयजल को लेकर संकट खड़ा हो गया है। पूरा मामला तहसील भोगांव में आने वाले ग्राम जमतरी का है। यहां पर विकास कार्यों की अनदेखी से नाराज ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। बुनियादी सुविधाओं के अभाव और प्रशासन की उदासीनता के विरोध में ग्रामीणों ने एकजुट होकर आगामी चुनाव के पूर्ण बहिष्कार का संकल्प लिया है।
ग्रामीणों ने गांव की गलियों में जमकर विरोध प्रदर्शन किया और जिला प्रशासन और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। ग्रामीणों का मुख्य मुद्दा गांव में नल (पेयजल व्यवस्था) का न होना है। प्रदर्शन के दौरान "नल नहीं तो वोट नहीं" जैसे नारों के साथ ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे इस बार मतदान प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनेंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि यह क्षेत्र यादव बाहुल्य है। जिसके चलते गांव के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। उनका आरोप है कि राजनीतिक कारणों से न तो गांव में नल लगाए जा रहे हैं और न ही अन्य कोई विकास कार्य कराए जा रहे हैं। बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे ग्रामीणों ने प्रशासन पर जानबूझकर उपेक्षा करने का गंभीर आरोप लगाया है।
Mainpuri: उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में पेयजल को लेकर संकट खड़ा हो गया है। पूरा मामला तहसील भोगांव में आने वाले ग्राम जमतरी का है। यहां पर विकास कार्यों की अनदेखी से नाराज ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। बुनियादी सुविधाओं के अभाव और प्रशासन की उदासीनता के विरोध में ग्रामीणों ने एकजुट होकर आगामी चुनाव के पूर्ण बहिष्कार का संकल्प लिया है।
ग्रामीणों ने गांव की गलियों में जमकर विरोध प्रदर्शन किया और जिला प्रशासन और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। ग्रामीणों का मुख्य मुद्दा गांव में नल (पेयजल व्यवस्था) का न होना है। प्रदर्शन के दौरान "नल नहीं तो वोट नहीं" जैसे नारों के साथ ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे इस बार मतदान प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनेंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि यह क्षेत्र यादव बाहुल्य है। जिसके चलते गांव के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। उनका आरोप है कि राजनीतिक कारणों से न तो गांव में नल लगाए जा रहे हैं और न ही अन्य कोई विकास कार्य कराए जा रहे हैं। बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे ग्रामीणों ने प्रशासन पर जानबूझकर उपेक्षा करने का गंभीर आरोप लगाया है।