DN Exclusive: पैतृक गांव आकर CJI सूर्यकांत को ये काम है पसंद, नोडल अधिकारी ने बताई दिलचस्प बातें

भारत के 53वें चीफ जस्टिस जस्टिस सूर्यकांत पद संभालने के बाद पहली बार अपने पैतृक गांव पेटवाड़ पहुंचे हैं। उसी सरकारी स्कूल में उनका सम्मान किया जा रहा है, जहां उन्होंने पढ़ाई की थी। इस दौरान गांव में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिल रहा है।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 10 January 2026, 1:23 PM IST

Hansi: भारत के 53वें चीफ जस्टिस, जस्टिस सूर्यकांत ने सीजेआई का पद संभालने के बाद पहली बार अपने पैतृक गांव पेटवाड़ पहुंचे हैं। यह गांव हरियाणा के नवगठित हांसी जिले में स्थित है, जो पहले हिसार जिले का हिस्सा थाइस खास मौके पर उनके सम्मान में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया है, जिसमें गांव और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए हैं

जहां पढ़े उसी स्कूल में सम्मान

जस्टिस सूर्यकांत ने पेटवाड़ गांव के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में छठीं से दसवीं तक की पढ़ाई की थीइसी स्कूल में आज उनका सम्मान समारोह आयोजित होना गांववासियों के लिए गर्व और भावुकता का क्षण बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसा आमतौर पर बहुत कम देखने को मिलता है कि कोई व्यक्ति देश के सर्वोच्च न्यायिक पद तक पहुंचकर उसी स्कूल में सम्मानित हो, जहां वह कभी छात्र रहा हो

गांव में उत्सव जैसा माहौल

समारोह के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैंस्कूल परिसर और गांव में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिल रहा हैस्कूली बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और युवा, सभी जस्टिस सूर्यकांत के स्वागत के लिए उत्साहित दिखाई दे रहे हैं। 

नोडल अधिकारी बोले- पूरा गांव खुश है

नोडल अधिकारी सुनील शर्मा ने बताया कि समारोह की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई थींउनके अनुसार, “पूरा गांव इस आयोजन में शामिल हैयह जगह किसी महल जैसी लग रही हैहम सभी जस्टिस साहब की सेवा करके बेहद खुश हैं।”

गांव में सीजेआई का पसंदीदा काम

नोडल अधिकारी ने डाइनामाइट न्यूज़ से हुई खास बातचीत में बताया कि जस्टिस सूर्यकांत का अपने गांव और स्कूल से गहरा जुड़ाव हैवे हर साल पेटवाड़ आते हैं और स्कूल के 10वीं व 12वीं के टॉपर्स को सम्मानित करते हैंगांव के खेतों में स्थित तालाब से उनकी विशेष भावनात्मक स्मृतियां जुड़ी हैंवे अक्सर वहां आधे घंटे तक अकेले बैठकर बचपन की यादें ताजा करते हैंउनके बड़े भाई गांव में रहते हैं, इसी कारण उनका आना-जाना नियमित रहता है

ऊंचे पद पर पहुंचकर भी सादगी की मिसाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि 1979 में इसी स्कूल से पास आउट होने वाले जस्टिस सूर्यकांत ने कभी अपने गांव और जड़ों को नहीं भुलायादेश के सर्वोच्च न्यायिक पद पर पहुंचने के बाद भी हर साल स्कूल आना और बच्चों को प्रेरित करना उनकी सादगी और जमीन से जुड़े रहने की सोच को दर्शाता है

Location : 
  • Hansi

Published : 
  • 10 January 2026, 1:23 PM IST