Video: जेल में गुजरी जवानी, बुढ़ापे में उम्रकैद रद्द; यूपी के चर्चित सामूहिक हत्याकांड के दो दोषियों का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू

46 साल पुराने सुल्तानपुर सामूहिक हत्याकांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले ने सबको चौंका दिया है। चार हत्याओं के मामले में दोषी ठहराए गए दो लोगों की उम्रकैद की सजा रद्द कर दी गई, लेकिन अदालत ने उनके अपराध को बरकरार रखा।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 21 October 2026, 6:34 PM IST

Lucknow: करीब 46 साल पुराने एक सामूहिक हत्याकांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के फैसले ने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अदालत ने चार लोगों की हत्या और कई लोगों पर जानलेवा हमले से जुड़े मामले में दो दोषियों सिराज अहमद और अब्दुल वाहिद की उम्रकैद की सजा रद्द कर दी है। जांच में सामने आया कि वारदात के समय दोनों की उम्र 18 साल से कम थी। हालांकि, अदालत ने उनके अपराध को खारिज नहीं किया है।

सिराज अहमद और अब्दुल वाहिद के इस मामले को अब किशोर न्याय बोर्ड भेजा गया है, जहां उनकी सजा तय की जाएगी।

पुरानी रंजिश में गई थी चार लोगों की जान

यह मामला 28 सितंबर 1980 का है। सुल्तानपुर जिले के कुड़वार थाना क्षेत्र के पिपरी गांव में पुरानी रंजिश को लेकर खूनी संघर्ष हुआ था। इस घटना में शमशद, अब्दुल रफीक, हामिद उल्लाह और दिलशेर की हत्या कर दी गई थी, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया था।

45 साल से ज्यादा समय तक चला कानूनी इंतजार

सत्र न्यायालय ने 14 दिसंबर 1981 को मामले में कई आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद समेत अलग-अलग सजाएं सुनाई थीं। इसके बाद फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। लंबी कानूनी प्रक्रिया के दौरान कई अपीलकर्ताओं की मौत हो गई, लेकिन सिराज अहमद और अब्दुल वाहिद की अपील पर सुनवाई जारी रही।

उम्र के सबूतों ने बदल दी सजा की तस्वीर

सुनवाई के दौरान दोनों की ओर से दावा किया गया कि घटना के समय वे नाबालिग थे। किशोर न्याय बोर्ड की रिपोर्ट और दस्तावेजों की जांच के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि घटना के दिन सिराज की उम्र 17 साल 10 महीने और अब्दुल वाहिद की उम्र 17 साल 11 महीने थी।

न्यायमूर्ति अब्दुल मोइन और न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने स्पष्ट किया कि दोषसिद्धि में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है, लेकिन किशोर होने के कारण दोनों को वयस्कों की तरह सजा नहीं दी जा सकती।

अब किशोर न्याय बोर्ड करेगा आगे का फैसला

हाईकोर्ट ने मामला किशोर न्याय बोर्ड को भेजते हुए दोनों को 28 अक्टूबर 2026 को पेश होने का निर्देश दिया है। बोर्ड को आदेश की प्रति मिलने के छह सप्ताह के भीतर उचित आदेश देना होगा। इस फैसले से दोनों के परिवार में राहत का माहौल है। उनके भाई रियाज अहमद ने कहा कि अगर नाबालिग होने के दावे पर पहले सुनवाई हुई होती, तो शायद उनके भाइयों की जिंदगी की दिशा अलग होती।

Location :  Lucknow

Published :  21 October 2026, 6:34 PM IST